पुण्यदायी सेवा समिति और देवोत्थान सेवा समिति की अनूठी पहल, 25 वर्षों में करीब 1.70 लाख अस्थियों का किया जा चुका है गंगा में विसर्जन


पांच हजार से अधिक अनाम अस्थियों को मिला सम्मान, सतीघाट पर विधि-विधान से हुआ विसर्जन

हरिद्वार (कमल शर्मा)। धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल स्थित सतीघाट पर शुक्रवार को मानवता, सेवा और सनातन संस्कारों का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला। पुण्यदायी सेवा समिति न्यास एवं देवोत्थान सेवा समिति की ओर से पांच हजार से अधिक अनाम अस्थियों का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अस्थियों को सम्मानपूर्वक घाट पर स्थापित कर पुष्प अर्पित किए तथा धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर दिवंगत आत्माओं की सद्गति और मोक्ष की कामना की।
इस वर्ष विभिन्न राज्यों से कुल 5,366 अस्थियां विसर्जन के लिए लाई गईं। इनमें ऐसे दिवंगत लोगों की अस्थियां भी शामिल थीं, जिनका कोई अपना अंतिम संस्कार के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार अस्थि विसर्जन करने के लिए उपलब्ध नहीं था। समिति वर्षों से ऐसे अनाम, निर्धन और असहाय दिवंगतों के लिए यह पुनीत सेवा करती आ रही है।
25 वर्षों में करीब 1.70 लाख अस्थियों का विसर्जन
पुण्यदायी सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने बताया कि समिति पिछले 25 वर्षों से अनाम अस्थियों के सम्मानजनक विसर्जन का कार्य कर रही है। इस अवधि में दिल्ली से लाई गईं करीब एक लाख सत्तर हजार अस्थियों का सतीघाट पर विसर्जन किया जा चुका है। इनमें पाकिस्तान के अलावा सिंगापुर सहित अन्य स्थानों से लाई गई अस्थियां भी शामिल रही हैं। इस सेवा का उद्देश्य उन दिवंगत आत्माओं को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप अंतिम सम्मान प्रदान करना है, जिनके परिजन उपलब्ध नहीं हैं या जो स्वयं अस्थि विसर्जन करने में सक्षम नहीं हैं।
मानव सेवा ही सच्ची सेवा : अध्यक्ष बी.के. मेहता
समिति के अध्यक्ष बी.के. मेहता ने कहा कि अनाम अस्थियों का सम्मानपूर्वक विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। मृत्यु के बाद प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। ऐसे दिवंगतों की अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन कराना समाज के संवेदनशील और मानवीय दायित्व को दर्शाता है।
निरंतर जारी है सेवा का संकल्प : महामंत्री अवनीश गोयल
समिति के महामंत्री अवनीश गोयल ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों से अस्थियां विसर्जन के लिए लाई जाती हैं। समिति का प्रयास रहता है कि कोई भी दिवंगत व्यक्ति केवल इसलिए अंतिम धार्मिक संस्कारों से वंचित न रह जाए कि उसके परिजन मौजूद नहीं हैं या परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। उन्होंने बताया कि समिति श्मशान घाट पर अनाम, निर्धन और दिवंगत व्यक्तियों के अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी एवं आवश्यक सामग्री भी निःशुल्क उपलब्ध कराती है।
अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन में सहयोग समाज की बड़ी जिम्मेदारी : आनंद प्रकाश टुटेजा
समिति के सचिव आनंद प्रकाश टुटेजा ने कहा कि जरूरतमंदों और अनाम दिवंगतों के अंतिम संस्कार में सहयोग करना सामाजिक संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। पुण्यदायी सेवा समिति का प्रयास है कि आर्थिक अभाव या परिजनों की अनुपलब्धता किसी भी दिवंगत के सम्मानजनक अंतिम संस्कार में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि इस तरह के सेवा कार्यों से समाज में परोपकार, करुणा और मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है।
वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा ने की सेवा कार्य की सराहना
वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अनाम अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन करना समाज के लिए प्रेरणादायी कार्य है। ऐसे सेवा कार्यों से यह संदेश मिलता है कि मानवता का धर्म जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति से ऊपर है। दिवंगतों को सम्मान देना और उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है।
संत-महात्माओं एवं समाजसेवियों का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान अवधूत मंडल पीठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी रामप्रकाश जी महाराज, डॉ. विशाल गर्ग, अनिल नरेंद्र तथा दिल्ली के विजय शर्मा को अभिनंदन पटका और प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर वीरेंद्र गोयल, अवनीश गोयल, आनंद प्रकाश टुटेजा, अशोक गुप्ता, जानकी प्रसाद, यशपाल, रविदत्त शर्मा, डॉ. संदीप मलिक, महेश काला, सुरेश अरोड़ा, सुनील मोदी, सुभाष शास्त्री, प्रेमचंद पोखरियाल, कुसुमलता शर्मा, नितिनदास सहित बड़ी संख्या में समिति के कार्यकर्ता एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
पुण्यदायी सेवा समिति न्यास की यह पहल समाज को संदेश देती है कि अंतिम विदाई के समय भी किसी व्यक्ति को सम्मान से वंचित नहीं रहना चाहिए। अनाम अस्थियों का विधि-विधान से विसर्जन कर समिति मानवता, सेवा और परोपकार की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रही है।
नोट: वीरेंद्र गोयल, बी.के. मेहता, अवनीश गोयल, आनंद प्रकाश टुटेजा और जगदीश लाल पाहवा के नाम से दिए गए बयान समाचार के लिए तैयार किए गए प्रारूप हैं। प्रकाशन से पहले संबंधित व्यक्तियों की सहमति और वास्तविक कथन के अनुसार इन्हें अंतिम रूप देना उचित होगा।

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