विश्व आयुर्वेद दिवस पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने किया प्रथम आयुर्वेद गुरुकुलम् का उद्घाटन

विश्व आयुर्वेद दिवस पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने किया प्रथम आयुर्वेद गुरुकुलम् का उद्घाटन

• संस्कृत के विद्यार्थी भी अब कर सकेंगे बीएएमएस, बनेंगे आयुर्वेदाचार्य
• निश्चित ही पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त व प्रभावी माध्यम बनेगा : उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री
• पूरे विश्व में आयुर्वेद की प्रतिष्ठा का हमारा संकल्प सिद्धि तक प्राप्त होगा : स्वामी रामदेव
• आयुर्वेद गुरुकुलम् भारत सरकार व प्रधानमंत्री मोदी जी की तरफ से देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व को एक देन है : आचार्य बालकृष्ण

हरिद्वार, 23 सितम्बर : ग्राम औरंगाबाद, हरिद्वार में विश्व के पहले आयुर्वेद गुरुकुल- पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम्, हरिद्वारम् का उद्घाटन उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व यज्ञ-मंत्रोच्चार के साथ धन्वन्तरि वंदना की गई। कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद के विद्यार्थियाें व विद्वानों को विश्व आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के शुभारंभ के साथ-साथ उत्ताराखण्ड की देवभूमि से देश व पूरी दुनिया का इतिहास लिखा गया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के विद्यार्थी भी अब बीएएमएस में सीधे प्रवेश पा सकेंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् की शुरूआत हमारी गौरवशाली सनातन परम्परा को आधुनिक ज्ञान व आधुनिक युग से जोड़ने की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल वह स्थान है जहाँ पुस्तकों के ज्ञान के साथ-साथ यह भी सिखाया जाता है कि जीवन कैसे जीया जाए, जीवन की चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए, स्वयं को आगे बढ़ाकर दूसरों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। गुरुकुलों में शिक्षा के साथ संस्कार, ज्ञान के साथ अनुशासन और बौद्धिक विकास के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी बल दिया जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि निश्चित ही पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त व प्रभावी माध्यम बनेगा।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के उद्घाटन के बाद अब विश्व इतिहास में पहली बार संस्कृत के विद्वान भी अब बीएएमएस कर सकेंगे। पतंजलि योगपीठ ने विश्व आयुर्वेद दिवस पर विश्व का पहला आयुर्वेद गुरुकुलम् स्थापित कर आयुर्वेद परम्परा की एक नई प्रतिष्ठा की है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि महर्षि चरक, सुश्रुत, धन्वन्तरि, वाग्भट्‌ट, अग्निवेश तथा हमारे महान प्राचीन महर्षियों ने आयुर्वेद की प्रतिष्ठा तो अथर्ववेद से ही कर दी थी, परंतु अभी तक यह व्यवस्था नहीं थी कि संस्कृत के विद्यार्थी बीएएमएस कर सकें।
उन्होंने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने यह बड़ा कार्य करके दिखाया है कि अब संस्कृत का विद्यार्थी, वेदों का विद्वान भी आयुर्वेदाचार्य (बीएएमएस) बन सकता है। आयुर्वेद की प्राचीन परम्परा के साथ आधुनिक विज्ञान को जोड़कर एक नया अभियान आज पतंजलि से प्रारंभ हुआ है जिससे पूरे विश्व में आयुर्वेद की प्रतिष्ठा का हमारा संकल्प निश्चित ही सिद्धि तक प्राप्त होगा।
स्वामी जी ने कहा कि एलोपैथी की सीमाएँ हैं, मॉडर्न मेडिकल साइंस में लिवर फेल्योर के लिए में कोई दवा नहीं है। पतंजलि ने लिवोग्रिट बनाकर पूरी दुनिया के लिए यह कार्य करके दिखाया है कि फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस ठीक हो सकता है। उन्होंने कहा कि रीनोग्रिट का प्रयोग करेंगे तो किडनी ट्रांसप्लांट नहीं कराना पड़ेगा। श्वासारि तथा ब्राेंकॉम श्वास व फेफड़ाें के रोगों में कारगर औषधि हैं। कार्डियोग्रिट व हृदयामृत के प्रयोग से पेसमेकर की समस्या से मुक्ति मिल रही है। आई ग्रिट व ईयर ग्रिट आँख व कान के रोगों में तथा मेमोरिग्रिट व मेधावटी मस्तिष्क रोगों में अत्यंत गुणकारी है।
कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि स्वामी जी शब्दों को अपने कार्यों के रूप में परिणित करते हैं, उसका ही परिणाम यह प्रथम आयुर्वेद गुरुकुल है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पतंजलि का नहीं अपितु आयर्वेद का है, हम सबका है, क्योंकि आयुर्वेद हम सबका है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब आयुर्वेद की वैश्विक प्रतिष्ठा होगी तो इसका श्रेय भी हम सबका साझा होगा।
आचार्य जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने संस्कृत के विद्यार्थियों काे आयुर्वेदिक चिकित्सक बनने का अवसर प्रदान करते हुए विशेष मान्यता प्रदान की है जिसके अन्तर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू) तथा नई दिल्ली भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) के साथ मिलकर पारंपरिक गुरुकुलम् पद्धति पर आधारित बीएएमएस पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है।
उन्होंने कहा कि गुरुकुल व आयुर्वेद महाविद्यालय तो हमने बहुत सुने थे किन्तु आयुर्वेद गुरुकुलम् शब्द भारत सरकार व प्रधानमंत्री मोदी जी की तरफ से देश को ही नहीं अपितु पूरे विश्व को एक देन है जो संस्कृत के प्रति उनकी निष्ठा, हमारे सनातन और आयुर्वेद की जड़ों से जुड़ी उनकी भावना को प्रदर्शित करता है। अभी सरकार की ओर से केवल जीयो जारी हुआ है और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को इसके लिए नियोजित किया गया है। इस गुरुकुलम् की रूपरेखा व अन्य औपचारिकताएँ केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय निर्धारित करेगा।
उत्तराखण्ड के माननीय आयुष मंत्री श्री मदन कौशिक ने कहा कि यह वास्तव में प्रदेश का सौभाग्य है कि भारत ही नहीं पूरे विश्व में पहली बार एक ऐसे संस्थान का प्रारंभ हो रहा है जिसकी भारत सरकार ने अभी मात्र घोषणा की है, लेकिन घोषणा के तुरंत बाद यदि किसी ने इस कार्य की धरातल पर उतारा है तो वे स्वामी रामदेव जी महाराज तथा आचार्य बालकृष्ण जी महाराज हैं। उन्होंने उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड के सभी हॉटल, धर्मशालाओं में पतंजलि वेलनेस सेंटर स्थापित करने का आग्रह किया।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष श्री एन.पी. सिंह ने कहा कि यह अद्भुत प्रयोग है कि 10वीं कक्षा के बाद 7.5 साल का कोर्स करके चिकित्सकीय पद्धति से विद्यार्थी का व्यक्तित्व व दक्षता आप्लावित होगी तो वे स्वाभाविक रूप से आयुर्वेद के स्वास्थ्य की मूलभूत अवधारणा को विश्व में ले जाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री, स्वामीजी व आचार्य जी के सपनों को साकार करेंगे।
इस अवसर पर पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् की वेबसाइट व पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया। क्षेत्र के ग्राम प्रधानों द्वारा माल्यार्पण कर मुख्यमंत्री जी का विशेष अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर बीएचईएल-रानीपुर विधायक श्री आदेश चौहान, ज्वालापुर विधायक इंजीनियर रवि बहादुर, पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के प्रथम प्राचार्य डॉ. केतन महाजन, आचार्या स्वाति आर्या, पतंजलि संस्थान के वरिष्ठ अधिकारीगण, भाजपा संगठन से ओमप्रकाश जमदग्नि, शोभाराम, आदेश सैनी, अजीत चौधरी, श्यामवीर सैनी, रूड़की मेयर अनीता अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, डॉ. मधु सिंह, बिंदर पाल, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, गौरव कौशिक, मनोज गौतम, नृपेंद्र चौधरी, लव शर्मा, चौधरी राजेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

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