हरिद्वार, 28 फरवरी 2026।
कमल शर्मा/धर्मनगरी हरिद्वार में इस बार होली का उत्सव एक अनोखे और आध्यात्मिक अंदाज में मनाया गया। जूना अखाड़ा स्थित माया देवी मंदिर प्रांगण में जूना अखाड़ा और निरंजनी अखाड़ा के संतों ने पारंपरिक गुलाल के साथ-साथ गाय के गोबर से ‘पंचगव्य होली’ खेलकर सनातन संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और आपसी प्रेम-सौहार्द का संदेश दिया।
फाल्गुन का महीना रंगों, उल्लास और उमंग का प्रतीक माना जाता है। देशभर में जहां एक ओर बरसाना की लठमार होली और मथुरा की फूलों वाली होली की धूम रहती है, वहीं हरिद्वार में संतों की यह अनोखी होली श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।
शुक्रवार को आयोजित इस आयोजन में संतों ने एक-दूसरे को प्राकृतिक रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। संतों ने बताया कि पंचगव्य का उपयोग भारतीय परंपरा में पवित्र और औषधीय माना जाता है तथा यह प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है। रासायनिक रंगों से होने वाले पर्यावरण और त्वचा के नुकसान से बचने के लिए प्राकृतिक और गौ-आधारित उत्पादों के प्रयोग का संदेश भी दिया गया।
संतों ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और सामाजिक समरसता का उत्सव है। प्रकृति के संरक्षण और गौसेवा के महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस होली को पर्यावरण मित्र बनाएं और पारंपरिक मूल्यों को अपनाएं।
धर्मनगरी हरिद्वार की इस अनोखी होली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां पर्व-त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, आध्यात्म और प्रकृति के संगम का संदेश लेकर आते हैं।
हरिद्वार में अनोखी होली: जूना अखाड़ा और निरंजनी अखाड़ा के संतों ने रंग और गोबर से खेली पंचगव्य होली, दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
