कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार की पावन धरा जहां साक्षात गंगा की लहरों में दिव्यता बहती है वही श्रवण नाथ नगर स्थित प्रसिद्ध श्री रामानंद आश्रम में भक्ति और श्रद्धा का एक अनुपम संगम देखने को मिला। प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर 1008 श्री भगवान दास जी महाराज की अष्टम पुण्यतिथि का आश्रम के वर्तमान महंत श्री प्रेमदास जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक समृद्धि उत्सव था, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ऐसा केंद्र बना जहां शिष्यों और भक्तों की आंखों में अपने गुरु के प्रति अगाध प्रेम छलक रहा था। ज्ञान का विशाल सूर्य एक दिव्या व्यक्तित्व इस पावन अवसर पर महाराज ने गुरुदेव व्यक्तिगत पर प्रकाश डाला।

उन्होंने अत्यंत धार्मिक शब्दों में कहा प्रातः स्मरणीय परम बंदिनिय साकेत वासी श्री भगवान दास जी महाराज का सानिध्य किसी साधारण मनुष्य का सानिध्य नहीं अपितु ईश्वर रूपी सानिध्य के सम्मान था जिस प्रकार सूर्य की किरणें किसी में भेदभाव नहीं करती ठीक उसी प्रकार प्रातः स्मरणीय श्री भगवान दास महाराज की कृपा और ज्ञान की वर्षा भी समस्त भक्तों पर एक सम्मान होती थी महंत जी ने उन्हें ज्ञान का एक विशाल सूर्य बताया जिन्होंने अपने तपोवन और विधाता से समाज के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाने का कार्य किया उनकी उपस्थिति मात्र से साधकों के संसय दूर हो जाते थे l

श्रद्धा और उल्लास का वातावरण पुण्यतिथि महोत्सव को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आश्रम परिसर गुरुवाणी और भजनों से गूंजमान रहा कार्यक्रम की कुछ प्रमुख झलकियां इस प्रकार रही पावन सानिध्य श्री महंत प्रेमदास जी महाराज की देखरेख में सांसद अनुष्ठान विधि विधान से संपन्न हुए श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों से आए संतों ने महाराज जी के जीवन दर्शन पर चर्चा की भंडारा व सेवा गुरुदेव की समृती में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया l

जिसमें भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया श्री भगवान दास जी महाराज भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके द्वारा आरोपित ज्ञान के बीच आज भी शिष्यों में जीवन में बट वृक्ष बनकर उन्हें छाया प्रदान कर रहे हैं

रामानंद आश्रम में आयोजित यह अष्टम पुण्यतिथि इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चे संत की शिक्षाएं और उनका आशीर्वाद सदैव जीवंत रहता है ऐसे महान मनीषी और ज्ञान के सूर्य को कोटि-कोटि नमन इस अवसर पर बाबा है योगी महाराज महंत नारायण दास पटवारी, महंत हरिदास महाराज, महंत दुर्गादास महाराज, महंत पहलाद दास महाराज, महंत मोहन सिंह महाराज ,श्री सूरज दास महाराज, कोतवाल कमल मुनि, कोतवाल धर्मदास सहित अनेक मठ मंदिरों आश्रमों से आए संत महापुरुष महंत श्री महंतों ने भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
