कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार। एकादश रुद्रा पीठ, भारत माता पुरम में आयोजित वार्षिक महोत्सव, यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा एवं अखिल भारतीय आध्यात्मिक कवि सम्मेलन का शुभारंभ अत्यंत भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कथा व्यास महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी संतोष आनंद सरस्वती (संतोष गुरुजी) महाराज के श्रीमुख से जैसे ही श्रीमद्भागवत कथा का अमृत प्रवाह आरंभ हुआ, उपस्थित श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हुआ मानो स्वयं अयोध्या की पावन संवेदनाएँ उस स्थल पर अवतरित हो गई हों।

महाराज श्री ने भगवान राम के जीवन चरित्र का अत्यंत मार्मिक, ओजस्वी एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के प्रसंग—श्रीराम जन्मोत्सव का उल्लास, वनवास का त्याग, केवट प्रसंग की विनम्रता और भरत मिलाप का अद्वितीय प्रेम—ने श्रोताओं के अंतर्मन को झकझोर दिया। श्रद्धालु कभी हर्ष से पुलकित हुए, कभी करुणा से द्रवित और कभी आत्मचिंतन में लीन दिखाई दिए।
एक सुंदर दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जैसे सूर्य उदित होते ही अंधकार स्वतः दूर हो जाता है, वैसे ही श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते ही मनुष्य के जीवन का अज्ञान, मोह और विकार नष्ट हो जाते हैं। जैसे गंगा में स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, उसी प्रकार कथा श्रवण से आत्मा निर्मल हो जाती है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का जीवन एक नाव के समान है, संसार सागर समान है और श्रीमद्भागवत कथा उस नाव की पतवार है—यदि पतवार सुदृढ़ हो तो जीवन के तूफान भी मार्ग नहीं रोक सकते।
इस पावन आयोजन में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का रसपान किया। भजन-कीर्तन से संपूर्ण एकादश रुद्र पीठ राममय हो उठा और वातावरण में ‘सीताराम’ के जयघोष निरंतर गूंजते रहे।
इस अवसर पर अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा गुरुजी (समाजसेवी), सचिव श्री जितेंद्र शर्मा जी, रजिस्टर संयोजक श्री धर्मेंद्र शर्मा जी, डिप्टी मैनेजर संचालक राम लखन शर्मा जी तथा अंकित शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में साधु-संतों एवं भक्तों ने भोजन भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बनकर सभी के हृदय में अविस्मरणीय छाप छोड़ेगा l
