गुरु भगवान श्री श्री हर मिलापी जी महाराज का 34 वा निर्वाण दिवस बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

कमल शर्मा (हरिहर समाचार)

हरिद्वार। श्रवण नाथ नगर स्थित प्रसिद्ध श्री हरमिलाप भवन में परम पूज्य गुरुदेव प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री हर मिलापी जी महाराज का 34 वा निर्वाण दिवस बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया इस अवसर पर एक विशाल संत समागम का आयोजन किया गया जिसमें देश के कोने से भक्तजन कार्यक्रम में भाग लेने हेतु पधारे इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय हरमिलाप भवन के परमाध्यक्ष श्री महंत मदन मोहन हरमिलालापी महाराज ने गुरुदेव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया भारत संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है। इसी पावन परंपरा में संत श्री हरमिलापी जी का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे केवल एक संत ही नहीं थे, बल्कि एक महान समाज सुधारक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और मानवता के सच्चे सेवक थे। उनका पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, प्रेम और सेवा के आदर्शों से परिपूर्ण रहा।

गुरुदेव हरमिलापीजी महाराज इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान का एक विशाल सूर्य थे उनके ज्ञान का प्रताप आज भी आश्रम तथा भक्त जनों के बीच सुख शांति समृद्धि के रूप में विद्यमान है गुरु भगवान हर मिलापी जी महाराज एक मृदुभाषी ज्ञान की गंगा थे उनके ज्ञान रुपी सरोवर में स्नान करने के बाद भक्त अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया करते थे हम उन्हीं के बताएं मार्ग पर चलते हुए उनके पद चिन्हों का अनुसरण कर अपने मानव जीवन को धन्य तथा कृतार्थ कर रहे हैं गुरु का मार्गदर्शन भक्तों के लिए परम कल्याणकारी होता है एक संत समाज के लिए अपने संपूर्ण जीवन को ईश्वर भक्ति में लगाकर समाज पर ईश्वर की कृपा एवं अनुकंपा की प्रार्थना करता है संत समाज के सच्चे पथ दर्शक होते हैं सच्चे मार्गदर्शक होते हैं

संत श्री हरमिलापी जी का जन्म एक साधारण किंतु धार्मिक परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका मन सांसारिक भोग-विलास से दूर और आध्यात्मिक चिंतन की ओर अधिक आकर्षित था। वे बचपन में ही संतों की संगति में रहकर भजन, कीर्तन और सत्संग में रुचि लेने लगे। उनका जीवन प्रारंभ से ही सादगी, संयम और सेवा का प्रतीक रहा।

युवावस्था में उन्होंने संसार की नश्वरता को पहचान लिया और ईश्वर-भक्ति के मार्ग को अपनाया। उन्होंने कठिन तपस्या, साधना और आत्मचिंतन के द्वारा आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त किया।

संत श्री हरमिलापी जी ने समाज सुधार के लिए अनेक कार्य किए। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया और गरीब व असहाय लोगों की सहायता की। वे सदैव दुखियों के दुःख हरने में लगे रहते थे।

उन्होंने लोगों को आपसी भाईचारे, स‌द्भाव और एकता का संदेश दिया। उनके प्रयासों से समाज में नैतिक मूल्यों का विकास हुआ l

हम सभी का कर्तव्य है कि हम उनके आदर्शों को अपनाकर एक अच्छे, सच्चे और सेवाभावी इंसान बनें।

महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद महाराज ने कहा परम पूज्य हर मिलापी जी महाराज समाज की चेतना थे समाज के सच्चे मार्गदर्शक थे इस अवसर पर बोलते हुए भागवत आचार्य ज्योतिर्मयानंद महाराज ने कहा श्री मदन मोहन हर मिलापी अपने गुरु श्री हर मिलापी जी महाराज के पद चिन्हों का अनुसरण करते हुए समाज कल्याण में लगे रहते हैं समाज उत्थान के कार्यों में आध्यात्मिक कार्यों में सदैव बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी विवेकानंद महाराज ने कहा परम तपस्वी ज्ञान मूर्ति हरमिलापी जी महाराज समाज का उत्थान करने वाले समाज को सही दिशा प्रदान करने वाले ज्ञान मणि संत थे उनके ज्ञान का प्रकाश सदैव इस पृथ्वी वासियों का मार्गदर्शन करता रहेगा इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी रविंद्रानंद महाराज ने कहा संत महापुरुषों का जीवन समाज को समर्पित होता है संत महापुरुष जो भी कार्य करते हैं उसमें जगत कल्याण की भावना निहित होती है इस अवसर पर बोलते हुए महंत रवि देव महाराज ने कहा सूर्य को किसी के परिचय की जरुरत नहीं होती परम वंदनीय श्री हर मिलापी जी महाराज ज्ञान का एक विशाल सरोवर थे इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय प्रसिद्ध योगाचार्य संगीता हर मिलापी जी महाराज ने कहा जो गुरु की शरणागत हो जाते हैं उनका मनुष्य जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता हैl

इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी रविंद्रानंद महाराज ने कहा संत महापुरुषों का जीवन समाज को समर्पित होता है संत महापुरुष जो भी कार्य करते हैं उसमें जगत कल्याण की भावना निहित होती है इस अवसर पर बोलते हुए महंत रवि देव महाराज ने कहा सूर्य को किसी के परिचय की जरूरत नहीं होती परम वंदनीय श्री हर मिलापी जी महाराज ज्ञान का एक विशाल सरोवर थे इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय प्रसिद्ध योगाचार्य संगीता हर मिलापी जी महाराज ने कहा जो गुरु की शरणागत हो जाते हैं उनका मनुष्य जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है गुरु बड़े ही भाग्य से मिलते हैं और जिनके जीवन में गुरु का मार्गदर्शन होता है उनके भाग्य का उदय हो जाता है और यह मानव जीवन सार्थक हो जाता है इस अवसर पर बोलते हुए परम सेवा भावी श्री गुरदीप जी ने कहा मनुष्य जब गुरु की शरणागत हो जाता है तो उसका जीवन इस मिथ्या संसार से भव सागर पार हो जाता है

इस अवसर पर भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे l गुरु गाथा रामायण जी पाठ का भव्य आयोजन हुआ सभी संत महापुरुषों के श्री मुख से वही ज्ञान की सरिता में सभी भक्तजनों ने गोते लगाकर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *