रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल में श्री रामकृष्ण परमहंस जी की 191वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई


हरिद्वार।
 रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम कनखल में श्री रामकृष्ण परमहंस जी की 191वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम मठ से शोभायात्रा निकाली गई जो कनखल के प्रमुख बाजारों से होती हुई रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के परिसर में समाप्त हुई।जिसमें बड़ी संख्या में साधु संतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मंगल आरती, हवन, जप और ध्यान का आयोजन किया गया।


इस अवसर पर आयोजित संत सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद महाराज ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस एक सिद्ध योगी थे और उन्होंने विश्व को एक महान धरोहर के रूप में एक महान शिष्य स्वामी विवेकानंद दिया, जिन्होंने पूरे विश्व में भारत की संस्कृति का प्रचार प्रसार किया और भारत की आध्यात्मिक शक्ति का पूरे विश्व में लोहा मनवाया। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि जिस राष्ट्र को परमहंस मिल जाए वह पूरे विश्व को संदेश देता है।


संत सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि हमारे अखाड़े के लिए सबसे महत्वपूर्ण और गौरव का विषय यह है कि रामकृष्ण परमहंस जी ने हमारे अखाड़े के श्री महंत तोतापुरी महाराज से संन्यास दीक्षा ली थी और इस तरह रामकृष्ण परमहंस आदि जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनाम संन्यास परंपरा में शामिल हुए और उनका इस परंपरा में बहुत उच्च कोटि का स्थान है। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण इतने बड़े साधक हो गए थे कि वह परमहंस की स्थिति में पहुंच गए और उन्होंने समाज को एकीकरण का संदेश दिया।


मुख्य वक्ता स्वामी अव्ययात्मानंद महाराज ने कहा कि समाज में जब भीआवश्यकता होती है तब महापुरुष और अवतार पुरुष लोग आते हैं और समाज को नई दिशा देते हैं। इसी तरह रामकृष्ण परमहंस देव जी ने अवतार लिया और समाज को अपने समय में एक नई दिशा दी और मानव सेवा का संदेश दिया।


इस अवसर पर सभी संतों का स्वागत करते हुए रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम कनखल के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानन्द महाराज ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस ने सभी धर्मो का पालन करके यह संदेश दिया कि ईश्वर एक है उसको पाने के रास्ते अलग-अलग हैं और इसलिए सभी धर्म के लोगों को मिलजुल का रहना चाहिए और मानव सेवा के लिए कार्य करना चाहिए।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर परमात्मा देव, महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद, महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद, महामंडलेश्वर स्वामी भगवत स्वरूप, महामंडलेश्वर स्वामी ललिता नंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी अभय आत्मानंद, कोठारी राघवेंद्र दास आदि ने अपनी भावांजलि दी।

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