भारतीय जनता पार्टी हरिद्वार जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने प्रेस क्लब हरिद्वार में प्रेस वार्ता कर मीडिया के सामने कांग्रेस के झूठ को किया बेनकाब


4/10/26
आज भारतीय जनता पार्टी हरिद्वार जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने प्रेस क्लब हरिद्वार में प्रेस वार्ता कर मीडिया के सामने कांग्रेस के झूठ को बेनकाब किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का ‘भूमि बचाओ’ अभियान भूमि संरक्षण की मुहिम नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक जमीन बचाने की छटपटाहट है। जिस कांग्रेस ने अपने शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट की, आज वही भूमि संरक्षण का झूठा चैंपियन बनने का ढोंग कर रही है। अपने कार्यकाल में जमीनों के आवंटन पर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस आज जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल में हुई जमीनों की बंदरबांट का हिसाब देना चाहिए, फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक साहस दिखाना चाहिए।


नानीसार प्रकरण कांग्रेस के भूमि प्रेम का पर्दाफाश करने के लिए काफी है। हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में 7.061 हेक्टेयर पंचायत भूमि महज 1,200 रुपये सालाना किराये पर 30 साल की लीज पर आवंटित की गई। इस फैसले का विरोध करने वाले 381 लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। ग्रामीणों के विरोध को मुकदमों से कुचलने वाली कांग्रेस आज किस मुंह से भूमि संरक्षण की बात कर रही है? जिस कांग्रेस के शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट के आरोप लगे, वह आज ‘भूमि बचाओ’ का नारा देकर जनता को गुमराह करने निकली है।


धौलास भूमि विवाद कांग्रेस की नीतिगत विफलता और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है। शैक्षणिक संस्थान के नाम पर करीब 20 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति दी गई, लेकिन फरवरी 2026 की प्रशासनिक जांच में सामने आया कि जमीन 15 लोगों को बेची गई और छोटे-छोटे प्लॉटों में बांटकर करीब 80 खरीदारों तक पहुंच गई। शिक्षा के पवित्र उद्देश्य के लिए दी गई जमीन प्लॉटिंग के कारोबार तक कैसे पहुंच गई? कांग्रेस को इसका जवाब देना होगा। आज भूमि संरक्षण का नारा देकर धामी सरकार पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने शासनकाल के फैसलों और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब दे।
सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं को जमीन आवंटन के मामले में कांग्रेस की अपनी ही सरकार की जांच आज तक सवालों के घेरे में है। गढ़वाल की 52 और कुमाऊं की 5 संस्थाओं को जमीन आवंटन पर गंभीर सवाल उठे, सितंबर 2016 में हरीश रावत सरकार ने जांच के आदेश भी दिए, लेकिन जांच का नतीजा क्या निकला और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई, यह आज तक स्पष्ट नहीं है। जमीन आवंटन में सवाल उठे तो कांग्रेस ने जांच की घोषणा कर दी, लेकिन कार्रवाई की बारी आई तो चुप्पी साध ली। आज भूमि संरक्षण का झंडा उठाने वाली कांग्रेस पहले बताए कि अपनी सरकार में शुरू कराई गई जांच का हिसाब जनता को क्यों नहीं दिया? कांग्रेस की राजनीति में जांच सिर्फ सुर्खियां बटोरने का हथियार है या जवाबदेही निभाने का माध्यम भी?
टाटा मोटर्स-सिडकुल भूमि आवंटन के मामले में कांग्रेस की दोहरी राजनीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वर्ष 2006 में पंतनगर में टाटा मोटर्स को 975.44 एकड़ जमीन 125 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से आवंटित की गई। बाद में वेंडर और सहयोगी कंपनियों को जमीन आवंटित किए जाने पर भी सवाल उठे। औद्योगिक भूमि का आवंटन और उसके बाद हुए हस्तांतरण की निगरानी तत्कालीन कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी थी। आज निवेश और भूमि प्रबंधन पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने शासनकाल में हुए इन आवंटनों का पूरा हिसाब दे। दूसरों से जवाब मांगने वाली कांग्रेस बताए कि उसके कार्यकाल में औद्योगिक जमीनों के आवंटन और हस्तांतरण पर उठे सवालों का जवाब आज तक क्यों नहीं मिला?
कांग्रेस का राजनीतिक अभियान चाहे जितना आक्रामक हो, उत्तराखंड का विकास रुकने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार सरकारी जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने, सख्त भू-कानून लागू रखने, स्थानीय हितों की रक्षा करने और अनुपयोगी जमीनों का प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए इस्तेमाल करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए अभियान चलाती रहे, धामी सरकार प्रदेश के भविष्य को मजबूत करने के लिए काम करती रहेगी।
इस अवसर पर प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, जिला महामंत्री हीरा बिष्ट,जिला उपाध्यक्ष लव शर्मा, निपेंद्र चौधरी, ओबीसी मोर्चा जिला अध्यक्ष लोकेश पाल ,जिला कार्यालय प्रभारी नकली राम सैनी उपस्थित रहे।

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