स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने पदनाम बदलकर टेक्निकल संवर्ग घोषित करने की उठाई मांग, वार्ड सहायक से लेकर प्रभारी वार्ड सहायक तक पदोन्नति की मांग; असहयोग आंदोलन और हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
देहरादून। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड ने कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति और पदनाम परिवर्तन की मांग को लेकर महानिदेशालय देहरादून के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और असहयोग आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर महानिदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल में वाद दायर किया जाएगा।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, महामंत्री सुनील अधिकारी, प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, जिला मंत्री राकेश भंवर एवं उपाध्यक्ष मूलचंद चौधरी ने कहा कि चार बार समझौता होने के बावजूद कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला आज तक लंबित है। संगठन लंबे समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लैब सहायक, डार्क रूम सहायक और ओटी सहायक के पदों पर पशुपालन एवं उद्यान विभाग की तर्ज पर पदोन्नति देने की मांग कर रहा है। 21 अगस्त 2026 को पुनः समझौता होने के बाद आईपीएचएस मानकों के तहत वन टाइम सेटलमेंट के माध्यम से पदोन्नति देने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अभी तक शासन को प्रस्ताव नहीं भेजा गया।
पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यों के अलावा तकनीकी प्रकृति के अनेक कार्य भी कर रहे हैं। मरीजों की ड्रेसिंग, प्लास्टर में सहयोग, आपातकालीन सेवाओं में सहायता, ऑपरेशन थिएटर में उपकरणों का स्टरलाइजेशन, जनरेटर एवं ऑक्सीजन जनरेटर चलाना, लैब और ब्लड बैंक में एचबी एवं ब्लड ग्रुप की जांच में सहयोग, रक्त लेना, वार्ड में आईवी फ्लूड बदलना और कैथेटर लगाने जैसे कार्यों में भी कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान भी सफाई कर्मचारियों और वार्ड बॉय ने सबसे आगे रहकर मरीजों की सेवा की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित प्रोत्साहन मिला और न ही पदोन्नति का लाभ।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत, उपाध्यक्ष नेल्सन अरोड़ा, प्रदेश संगठन सचिव दिनेश गुसाईं एवं सुरेंद्र कश्यप ने कहा कि दस वर्ष पूर्व 47 पदों पर पदोन्नति हुई थी, जबकि अब दस साल बाद मात्र 39 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया की जा रही है। इसमें भी यूकेएसएसएससी के माध्यम से परीक्षा कराने की व्यवस्था की जा रही है, जिसे कर्मचारी अपने हितों के प्रतिकूल मान रहे हैं। संगठन का कहना है कि लगभग 150 से 200 कर्मचारी पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं, जबकि इतने ही कर्मचारी पदोन्नति की आस लगाए बिना लाभ प्राप्त किए सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वैक्सीनेटर और उद्यान विभाग में माली को टेक्निकल घोषित कर उद्यान सहायक बनाया जा सकता है तो स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
संगठन ने मांग की है कि वार्ड बॉय और वार्ड आया का पदनाम बदलकर वार्ड सहायक, वरिष्ठ वार्ड सहायक एवं प्रभारी वार्ड सहायक किया जाए। सफाई कर्मचारियों को पर्यावरण सहायक, वरिष्ठ पर्यावरण सहायक एवं प्रभारी पर्यावरण सहायक बनाया जाए। इसी प्रकार चौकीदार को गार्ड, वरिष्ठ गार्ड एवं मुख्य गार्ड तथा अनुसेवक को कार्यालय सहायक, वरिष्ठ कार्यालय सहायक एवं प्रभारी कार्यालय सहायक का पदनाम दिया जाए। इन पदों को टेक्निकल घोषित करते हुए उद्यान विभाग की भांति 4200 ग्रेड पे का लाभ दिया जाए, ताकि कर्मचारी सम्मानजनक स्थिति में सेवानिवृत्त हो सकें।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा एवं महामंत्री सुनील अधिकारी ने दो टूक कहा कि यदि महानिदेशालय प्रशासन ने पदोन्नति और पदनाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। कर्मचारी उन कार्यों का भी बहिष्कार करेंगे जो उनके निर्धारित दायित्वों में शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही महानिदेशालय में कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न और शोषण के विरोध में न्यायालय की शरण ली जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही महानिदेशालय को पत्र सौंपा जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा तथा बताया जाएगा कि किस प्रकार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पूरे सेवाकाल में पदोन्नति की प्रतीक्षा करते हुए सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
प्रदर्शन में दिनेश लखेड़ा, सुनील अधिकारी, राजेंद्र तेश्वर, राकेश भंवर, मूलचंद चौधरी, नितिन, चंद्र प्रकाश सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे। वहीं उपनल कर्मचारियों ने भी चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ को अपना समर्थन दिया है। संगठन ने बताया कि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के उपनल कर्मचारियों को भी संगठन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
— दिनेश लखेड़ा, प्रदेश अध्यक्ष, चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड













