छात्राओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण ही प्रगतिशील समाज की नींव: प्रो बत्रा

आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता आज के समय की मांग: मानसी मिश्रा

महाविद्यालय में आत्मरक्षा पर कार्यशाला आयोजित, छात्राओं ने सीखे आत्मरक्षा के गुर

हरिद्वार 16 अक्टूबर 2026

एस.एम.जे.एन. (पी.जी.) कॉलेज, हरिद्वार में आज अस्मिता फाउंडेशन एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में छात्राओं के लिए आत्मरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकों से परिचित कराना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक एवं सजग बनाना था। इस पहल के माध्यम से छात्राओं को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने, सतर्कता के साथ निर्णय लेने और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने के प्रति प्रेरित किया गया।

कार्यशाला में छात्राओं को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए अस्मिता फाउंडेशन की ओर से आये ट्रेनर अमन राजपूत ने बताया गया कि व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए शारीरिक कौशल के साथ-साथ मानसिक सजगता, आत्मविश्वास और परिस्थितियों को समझने की क्षमता भी आवश्यक है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण छात्राओं को संभावित जोखिमों की पहचान करने, असुरक्षित परिस्थितियों से बचने तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सहायता प्रदान करता है। इस अवसर पर युवा ट्रेनर कुमारी नैना चौहान ने कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण छात्राओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाने और उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होने कहा कि विपरीत परिस्थितियां बता कर नहीं आती। इसलिए सभी को आत्मरक्षा की विधियों को आत्मसात करना आवश्यक हैं।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने अपने संदेश में कहा कि छात्राओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण एक सुरक्षित एवं प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना भी है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण छात्राओं में आत्मविश्वास, साहस और जागरूकता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। प्रो बत्रा ने कहा कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने के साथ-साथ उपलब्ध सहायता प्रणालियों और अपने अधिकारों की जानकारी भी रखनी चाहिए।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय माहेश्वरी ने कहा कि छात्राओं का सशक्तीकरण तभी प्रभावी हो सकता है, जब उन्हें शिक्षा के साथ आत्मरक्षा, आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने के अवसर भी प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ छात्राओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने, भयमुक्त होकर आगे बढ़ने और जीवन की विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने अस्मिता फाउंडेशन के साथ इस संयुक्त पहल को छात्राओं के हित में महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे प्रयासों की उपयोगिता पर बल दिया।

इस अवसर पर अस्मिता फाउंडेशन की सचिव श्रीमती मानसी मिश्रा ने कहा कि आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता आज के समय की मांग हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं के समाज तक यह सन्देश पहुँचता हैं कि आत्मरक्षा केवल शारीरिक तकनीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जागरूकता, सतर्कता, आत्मविश्वास और समय पर उचित निर्णय लेने का समन्वय है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें, किसी भी असहज या जोखिमपूर्ण परिस्थिति में सतर्क रहें तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार, शिक्षकों, संस्थागत सहायता तंत्र और संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने में संकोच न करें।

इस अवसर पर फाउंडेशन की ओर से समाज के विभिन्न क्षेत्रो में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्राचार्य प्रो सुनील कुमार बत्रा, डॉ संजय माहेश्वरी , राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल, पर्यावरणविद डॉ विजय शर्मा तथा महाविद्यालय की प्राध्यापिकाओं डॉ पूर्णिमा सुन्दरियाल, श्रीमती रिंकल गोयल, डॉ सरोज शर्मा को भी सम्मानित किया गया।
महाविद्यालय में आयोजित हुई इस कार्यशाला का संयोजन डॉ पूर्णिमा सुन्दरियाल ने किया। इस अवसर पर डॉ शिव कुमार चौहान, श्रीमती नीता नैय्यर, श्रीमती विमलेश गौड़, श्रीमती आरती मेहता, श्रीमती नीरू कौशिक, श्री गौरव ककरान, सुमन अस्थाना, डॉ मीनाक्षी शर्मा, श्रीमती रिचा मिनोचा सहित अनेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे l

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