कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
नहरबंदी के दौरान गंगा सफाई अभियान चलाया जाता है परंतु उत्तराखंड सिंचाई विभाग के द्वारा नवनिर्मित घाट बनाने पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है दशहरे से लेकर छोटी दीपावली तक नहर बंद होने के कारण हर साल उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के द्वारा गंगा सफाई की जाती है इसमें जिला प्रशासन नगर निगम सभी सम्मिलित होते हैं अबकी बार पहली बार ऐसा हो रहा है अर्ध कुंभ को देखते हुए उत्तराखंड सिंचाई विभाग भी सक्रिय हुआ और भारी मशीनों के द्वारा चार ठेकेदारों को ऑनलाइन टेंडर जारी कर लगभग 20 करोड रुपए के काम आवंटित कर दिए गए जिनका एग्रीमेंट भी बाद में दिया गया 3 तारीख से काम शुरू कर दिया गया था और कार्य अनुबंध में 3 अक्टूबर 2025 को कार्य जारी करने की तिथि है और 2 अप्रैल 2025 में कार्य खत्म करने की तिथि दर्शाई गई है जो की एक तरीके का फर्जीवाड़ा नजर आ रहा है जबकि 2 तारीख दशहरे वाले दिन नाहरबंदी की गई थी और ना ही उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से इस संबंध में कोई एनओसी नहीं ली गई l

उत्तर प्रदेश के विभाग के अधिकारियों के द्वारा लगातार पत्राचार भी किया जा रहा है जिसका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है उसी क्रम में उत्तराखंड सिंचाई विभाग के द्वारा जो ठेके दिए गए हैं ठेकेदारों द्वारा लगातार घाटों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है जिस उद्देश्य से नाहरबंदी की जाती है नहर सफाई नहीं की जा रही है जो घाट बने हैं उन पर गंदगी कम बात झुका तू लगा हुआ है इस और सिंचाई विभाग उत्तराखंड द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है अर्ध कुंभ को देखते हुए जो घाट बनाए जा रही है कुछ महात्माओं का कहना है कि यह अर्ध कुंभ है ना कि महाकुंभ महाकुंभ उज्जैन और नासिक में 2027 में पड़ रहा है इसलिए हरिद्वार अध कुंभ में भीड़ कब आने की आशंका है और जो घाट बने हुए उन्हें पर्याप्त है सरकार की मंशा साफ नजर आ रही है कि जिला प्रशासन के साथ मिलकर पैसे की बंदर बाट करने का काम किया जा रहा है इसका ताजा उदाहरण आपके सामने नजर आ रहा है अमरपुर घाट से लेकर सिंह द्वारा तक कावड़ पटरी पर काफी वर्क लगे हुए हैं जिस पर हरिद्वार के लोग सुबह शाम टहलने आते हैं और बाहर के लोगों को भी आना चाहता है और घाट बनने से काफी संख्या में पेड़ों को कटान होगा जिससे पर्यावरण को खतरा महसूस हो रहा है टहलने आते बुजुर्ग व्यक्तियों का भी कहना है कि है गलत हो रहा है प्रशासन को इसमें संज्ञान लेना चाहिए घाट बनाए परंतु पेड़ों का बचाकर घाट बनाने का काम किया जाए एक तरफ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जी पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ अभियान एक पेड़ मां के नाम का अभियान चलाए हुए और दूसरी ओर अधिकारी उसे पर पलीता लगाते नजर आ रही है हरे पेड़ों को काटने की योजना बनाई जा रही है यह कैसा सुशासन है इस संबंध में उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जब जवाब किया जाए तो कोई जवाब देने को तैयार नहीं है


