सच्ची भक्ति प्रेम में निहित है, कर्मकांड में नहीं:पं०देवेन्द्र कृष्ण आचार्य जी

कमल शर्मा हरिहर समाचार

गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी माँ माया देवी जी की छत्रछाया में माँ गंगा के तट पर श्री गीता भवन मंदिर भोला गिरि रोड़, हरिद्वार में सर्व जन कल्याणार्थ आप सब के द्वारा बीसवां श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ सप्ताह का आयोजन, दिनांक 13 अगस्त 2025, बुधवार से 19 अगस्त 2025, मंगलवार सायं 3.00 बजे से 7.00 बजे तक बडी धूम-धाम के साथ किया जा रहा है। कथा व्यास भागवत मर्मज्ञ पं० देवेन्द्र कृष्ण आचार्य जी के श्रीमुख से अमृत वर्षा हो रही है। आज कथा के पांचवें दिन कथा व्यास भागवत मर्मज्ञ पं० देवेन्द्र कृष्ण आचार्य जी के श्रीमुख से श्री कृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन लीला, कंस वध कथा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया l

कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए व्यास जी बताते हैं कि श्री कृष्ण का जन्म वासुदेव और देवकी के गर्भ से कारगार में हुआ था. वासुदेव ने श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा के यहां दे दिया था, जहां यशोदा ने अपने लल्ला कान्हा को बड़े ही लाड़ प्यार से पाला. भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही नटखट थे l गोवर्धन लीला: प्रेम, विश्वास और विनम्रता का दिव्य नाटक दिव्य गोवर्धन लीला में, भगवान कृष्ण ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाते हैं, और हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति प्रेम में निहित है, कर्मकांड में नहीं। इसी प्रकार कंस बध की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण ने चाणूर को और बलराम ने मुष्टिक को अपने धाम बैकुण्ठ पहुंचाया। उन्हें निजधाम पहुंचने के पश्चात् श्री कृष्ण ने कंस को उसके सिंहासन से उसके केश पकड़ कर उसे घसीटा और उसके भूमि पर गिरते ही श्री कृष्ण ने उसके हृदय पर जोरदार मुक्का मारकर उसके प्राण ले लिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *