कमल शर्मा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसने राजनीति के पारंपरिक ढांचे को चुनौती दे दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आउसग्राम विधानसभा सीट से कलिता मांझी को उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया है।
कलिता मांझी, जो अब तक 4-5 घरों में झाड़ू-पोंछा और बर्तन मांजकर अपना जीवन यापन करती रही हैं, अचानक राजनीति के केंद्र में आ गई हैं। उनकी सादगी और संघर्ष की कहानी लोगों को भावुक कर रही है। जानकारी के अनुसार, उनके पास मात्र 6 धोती, लगभग 3 हजार रुपये नकद और करीब 2 हजार रुपये मासिक आमदनी है।
भाजपा के इस फैसले को आम आदमी को राजनीति में प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है। जहां आमतौर पर चुनावों में करोड़पति उम्मीदवारों का दबदबा रहता है, वहीं कलिता मांझी जैसी साधारण महिला को टिकट देना एक अलग संदेश देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने की पहल है। वहीं आम जनता के बीच भी इस फैसले की चर्चा जोरों पर है और कई लोग इसे “जमीनी राजनीति” का उदाहरण बता रहे हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कलिता मांझी जनता का कितना विश्वास जीत पाती हैं, लेकिन फिलहाल उनका नाम एक प्रेरणा और चर्चा का केंद्र जरूर बन चुका है।
झाड़ू-पोंछा करने वाली कलिता मांझी को भाजपा ने बनाया उम्मीदवार, सियासत में सादगी की मिसाल”
