अलकनंदा घाट पर ‘भाजपा भगाओ, धामी हटाओ’ के नारों से गूंजा हरिद्वार, कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन जारी; हरीश रावत ने सरकार को घेरा, विधायक रवि बहादुर ने भी उठाए सवाल


सार्वजनिक संपत्तियां बेचकर प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दांव पर लगा रही भाजपा सरकार: हरीश रावत

हरिद्वार (कमल शर्मा)। हरिद्वार के अलकनंदा घाट पर बुधवार को ‘भाजपा भगाओ, धामी हटाओ’ के नारों के बीच कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी वीरेंद्र रावत और ज्वालापुर विधायक इंजीनियर रवि बहादुर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों को लीज पर देने और सरकारी जमीनों को बेचने के आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साधा।
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों को लीज पर देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। वर्ष 2018 में लिए गए फैसलों के तहत जमीनें बेचे जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें बेचने और लीज पर देने में जुटी है। आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए सरकार ने क्या छोड़ा है, यह बड़ा सवाल है।
हरीश रावत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तराखंड की संपत्तियां केवल वर्तमान सरकार की नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। इन संपत्तियों को लेकर सरकार को प्रदेश की जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राहुल गांधी और खड़गे की बैठक में गैरमौजूदगी पर भी दिया जवाब
2 नवंबर को राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक में अपनी गैरमौजूदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड चुनाव को लेकर नीतिगत फैसले लेने के लिए संबंधित नेताओं को बुलाया गया था। जब पार्टी को उनकी आवश्यकता होगी, तब वह भी बैठक में पहुंचेंगे।
वहीं, 6 नवंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्तावित उत्तराखंड दौरे पर तंज कसते हुए हरीश रावत ने कहा कि गृहमंत्री अब उत्तराखंड में बिकी हुई जमीनों का हिसाब लेने आ रहे हैं।
विधायक रवि बहादुर ने भी सरकार से मांगा जवाब
धरना-प्रदर्शन में मौजूद ज्वालापुर विधायक इंजीनियर रवि बहादुर ने भी प्रदेश की संपत्तियों और जमीनों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सार्वजनिक संपत्तियां जनता की अमानत हैं और इनके संबंध में लिए जाने वाले फैसलों में पारदर्शिता होनी चाहिए। सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन संपत्तियों को किस आधार पर लीज पर दिया जा रहा है और जमीनों की बिक्री से प्रदेश को क्या लाभ हुआ है।
धरना स्थल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदेश की संपत्तियों के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध किया और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही।

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