ऋषिकेश में ‘महा योग ध्यान कुंभ-9’ का भव्य शुभारंभ, 18 देशों के 10 हजार से अधिक साधक ले रहे भाग

ऋषिकेश में ‘महा योग ध्यान कुंभ-9’ का भव्य शुभारंभ, 18 देशों के 10 हजार से अधिक साधक ले रहे भाग

पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन, साध्वी भगवती सरस्वती सहित कई आध्यात्मिक विभूतियों ने दिया ध्यान, करुणा और विश्व शांति का संदेश

ऋषिकेश, 23 अक्टूबर। उत्तराखंड की आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश में पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (PSSM) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त तत्वावधान में नौवें ‘महा योग ध्यान कुंभ’ (MYDK 2026) का श्री स्वामीनारायण आश्रम, मुनि की रेती में भव्य शुभारंभ हुआ। 23 से 27 अक्टूबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में आयोजकों के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों और 18 देशों से 10,000 से अधिक पंजीकृत ध्यान साधक भाग ले रहे हैं। आयोजन की थीम ‘आंतरिक परिवर्तन से विश्व शांति’ है। कार्यक्रम को पर्यटन मंत्रालय के इनक्रेडिबल इंडिया अभियान और आयुष मंत्रालय का सहयोग प्राप्त है।

आध्यात्मिक संदेश से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में ब्रह्मर्षि पितामह सुभाष पत्री जी का रिकॉर्डेड संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने बुद्ध, कृष्ण, ईसा मसीह और गुरु नानक जैसे आध्यात्मिक महापुरुषों की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए आत्मबोध और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ध्यान के लिए परिवार या नौकरी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। स्वाध्याय, आध्यात्मिक पुस्तकों के अध्ययन, पिरामिड निर्माण और आनापानसति ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने साधना में आध्यात्मिक अहंकार से बचने का भी संदेश दिया।

पद्मश्री डी. आर. कार्तिकेयन, पूर्व निदेशक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), ने भगवान बुद्ध से एस. एन. गोयनका तक विपश्यना की परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि सुभाष पत्री जी ने आनापानसति ध्यान को सरल और जनसुलभ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ध्यान, संगीत और पिरामिड ऊर्जा के साथ साधना के अभ्यास का उल्लेख किया। उन्होंने व्यक्तिगत शांति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दिशा में ध्यान तथा पौध-आधारित आहार की भूमिका पर बल दिया।

साध्वी भगवती सरस्वती ने समझाया ध्यान और साक्षी भाव का महत्व

परमार्थ निकेतन की अंतरराष्ट्रीय निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां गंगा के तट पर बैठना व्यक्ति को सहज रूप से शांति और ध्यान की अनुभूति करा सकता है। उन्होंने बताया कि ध्यान का अर्थ केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षण में सजगता, संवेदनशीलता और जागरूकता बनाए रखना भी है।

क्रोध को नियंत्रित करने के विषय में उन्होंने साक्षी भाव का महत्व समझाया। उनके अनुसार, ध्यान व्यक्ति को अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने में मदद कर सकता है। इससे क्रोध को प्रेम, रचनात्मक कार्य और निःस्वार्थ सेवा में परिवर्तित करने की प्रेरणा मिलती है।

स्वामी सुनील भगत ने स्वामीनारायण आश्रम में उपस्थित साधकों का स्वागत किया। उन्होंने महा योग ध्यान कुंभ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री जी का वर्ष 2013-14 में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दौरान ऋषिकेश आगमन हुआ था। इसके बाद वर्ष 2017 में दिवंगत डॉ. एल. एन. शास्त्री के साथ इस आयोजन की शुरुआत हुई।

आचार्य गंगाराम जी ने ‘ध्यानं निर्विषयं मनः’ के सिद्धांत को समझाते हुए मन को बाहरी विषयों से हटाकर अंतर्मुखी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने इंद्रियों को भीतर की ओर केंद्रित करके अपने वास्तविक स्वरूप को जानने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।

स्वर्णमाला पत्री के मार्गदर्शन में सामूहिक ध्यान

स्वर्णमाला पत्री जी के सान्निध्य में हजारों साधकों ने सामूहिक आनापानसति ध्यान का अभ्यास किया। इस सत्र में साधकों ने आंखें बंद करके और हाथों की उंगलियां आपस में जोड़कर स्वाभाविक श्वास के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित किया। मौन और श्वास के प्रति सजगता इस अभ्यास के प्रमुख आधार रहे।

पी. वी. रामराजू ने ध्यान की विभिन्न अवस्थाओं और आध्यात्मिक साधना की प्रगति के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने आनापानसति से मन की स्थिरता, आंतरिक ऊर्जा के अनुभव, नाड़ी तंत्र की शुद्धि से संबंधित कायानुपश्यना और आंतरिक दृष्टि के विकास से संबंधित विपश्यना तक की प्रक्रिया समझाई।

उन्होंने ध्यान, स्वाध्याय, सत्संग और ध्यान के प्रसार को आध्यात्मिक प्रगति के महत्वपूर्ण चरण बताते हुए एक प्रतीकात्मक उदाहरण दिया। इसमें ध्यान की गति 60, ध्यान के साथ अध्ययन की 160, सत्संग की 300 और ध्यान के प्रसार की 500 किलोमीटर प्रति घंटे के रूप में प्रस्तुत की गई। इसका उद्देश्य नियमित साधना के साथ अध्ययन, सामूहिक सहभागिता और सेवा को जोड़ने की प्रेरणा देना था।

बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं

पहले दिन के दूसरे सत्र में ध्यान विज्ञान, व्यावहारिक साधना और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम आयोजित किए गए। पिरामिड मास्टर्स ने प्रतिभागियों को ध्यान के नियमित अभ्यास तथा दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता के बारे में मार्गदर्शन दिया।

बच्चों के लिए स्वामीनारायण आश्रम की पहली मंजिल पर ‘जागृत किड्स’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सामाजिक-भावनात्मक विकास, एकाग्रता और ध्यान के अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया गया।

इंदिरा निकुंज में आयोजित ‘स्वानुभव यूथ’ कार्यक्रम किशोरों और युवाओं के लिए समर्पित रहा। इसमें 12 से 25-30 वर्ष तक के प्रतिभागियों को ध्यान को दैनिक जीवन में अपनाने, पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक संतुलन विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

108 घंटे का अखंड ध्यान और ऊर्जा मेला आकर्षण का केंद्र

महा योग ध्यान कुंभ के दौरान 23 से 27 अक्टूबर तक स्वामीनारायण आश्रम में 108 घंटे का अखंड ध्यान संचालित किया जा रहा है। इसके लिए छह-छह घंटे की पालियों में चौबीसों घंटे ध्यान साधना की व्यवस्था की गई है।

आश्रम परिसर में ‘ऊर्जा मेला’ भी लगाया गया है, जहां आध्यात्मिक पुस्तकों, ध्यान साहित्य और पिरामिड से संबंधित आध्यात्मिक विज्ञान के उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई है। गंगा रिसॉर्ट स्थित जीएमवीएन परिसर में पंजीकृत साधकों के लिए बैंड के आधार पर अन्नप्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई है।

आंतरिक परिवर्तन से विश्व शांति का संदेश

पांच दिवसीय ‘महा योग ध्यान कुंभ-9’ का उद्देश्य ध्यान को जनसामान्य तक पहुंचाना, बच्चों और युवाओं में मानसिक सजगता विकसित करना तथा व्यक्तिगत आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से समाज में शांति, करुणा और सद्भाव को प्रोत्साहित करना है।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में आध्यात्मिक चिंतन, सामूहिक ध्यान, स्वाध्याय और जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से विश्व शांति का संदेश दिया जा रहा है।

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