काष्र्णि भक्ति धाम में गुरुकुल के विद्यार्थियों के साथ धूमधाम से मनाया गया विजयदशमी पर्व, महाराज श्री ने दिया धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश


बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है विजयदशमी: स्वामी अमृतानंद जी महाराज

हरिद्वार। श्यामपुर कांगड़ी स्थित काष्र्णि भक्ति धाम के पीठाधीश्वर स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने विजयदशमी के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। इस अवसर पर आश्रम में गुरुकुल के विद्यार्थियों के साथ विजयदशमी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। आश्रम का वातावरण भक्तिमय रहा और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पर्व के आयोजन में भाग लिया।
इस अवसर पर स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने विजयदशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विजयदशमी का पर्व हमें सत्य की राह पर चलने, धर्म का पालन करने और बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा देता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्शों के प्रति समर्पित रहने की शिक्षा देता है।
महाराज श्री ने कहा कि विजयदशमी का वास्तविक संदेश केवल रावण के पुतले का दहन करना नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को समाप्त करना है। जब व्यक्ति अपने आचरण में सत्य, सदाचार, प्रेम और करुणा को अपनाता है, तभी इस पर्व की सार्थकता सिद्ध होती है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। गुरुकुल शिक्षा पद्धति विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है। संस्कारवान युवा ही समाज और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।
स्वामी अमृतानंद जी महाराज ने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि वे विजयदशमी के अवसर पर समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लें। उन्होंने कामना की कि भगवान श्रीराम की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार हो तथा देश में धर्म, सत्य और सद्भाव की विजय का मार्ग सदैव प्रशस्त रहे।
काष्र्णि भक्ति धाम में गुरुकुल के विद्यार्थियों के साथ मनाया गया विजयदशमी का पर्व धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और संस्कारों के महत्व का संदेश देने वाला रहा।

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