दक्षिण काली मंदिर में आध्यात्मिक रंगों से सजी सनातन संस्कृति, स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने पेंटर पीयूष को दिया आशीर्वाद
भोले बाबा, मां काली, मां पार्वती और भगवान श्रीकृष्ण की अनुपम कलाकृतियों ने मोहा मन, महाराज श्री ने 13 नई पेंटिंग बनवाकर बढ़ाया कलाकार का उत्साह
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के श्यामपुर स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर परिसर में आध्यात्मिक कला और सनातन संस्कृति का मनोहारी संगम देखने को मिला। निरंजनी पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के पावन आशीर्वाद से पेंटर पीयूष ने अपनी आध्यात्मिक पेंटिंग्स का प्रदर्शन किया। उनकी कलाकृतियों में भगवान भोलेनाथ, मां काली, मां पार्वती और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूपों को बेहद आकर्षक एवं भावपूर्ण ढंग से उकेरा गया। इन चित्रों में कलाकार की साधना, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण की झलक दिखाई दी।

इस अवसर पर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने पेंटर पीयूष की कला की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। महाराज श्री के सानिध्य और प्रोत्साहन से कलाकार को अपनी प्रतिभा को और निखारने तथा आध्यात्मिक कला के माध्यम से सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार की प्रेरणा मिली।

पेंटर पीयूष ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनकी भेंट स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज से हुई थी। इस दौरान उनके द्वारा तैयार की गई महाराज श्री की पेंटिंग उन्हें विशेष रूप से पसंद आई। कलाकृति से प्रसन्न होकर महाराज श्री ने उनसे 13 अन्य पेंटिंग्स भी बनवाईं। पीयूष ने कहा कि किसी कलाकार के लिए यह बेहद गौरव और प्रेरणा का विषय है कि उसकी कला को संत-महात्माओं का स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हो। महाराज श्री से मिले प्रोत्साहन ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है।

इस अवसर पर डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा, “कला ईश्वर की आराधना और भावों की अभिव्यक्ति का एक सुंदर माध्यम है। जब कोई कलाकार अपनी प्रतिभा के जरिए देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूपों को प्रस्तुत करता है और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करता है, तो उसका कार्य विशेष महत्व रखता है। पेंटर पीयूष को अपनी कला के प्रति इसी प्रकार समर्पित रहना चाहिए। निरंतर परिश्रम, लगन और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते हुए वे अपनी प्रतिभा से नई पहचान स्थापित करें और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में योगदान दें।”
पेंटर पीयूष ने कहा, “मेरे लिए पेंटिंग बनाना केवल एक कला नहीं, बल्कि अपनी आस्था और भावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त करने का माध्यम है। भगवान भोलेनाथ, मां काली, मां पार्वती और भगवान श्रीकृष्ण के चित्र बनाते समय मन में श्रद्धा का भाव रहता है। स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का स्नेह और आशीर्वाद मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। महाराज श्री द्वारा मेरी बनाई पेंटिंग को पसंद करना और 13 अन्य पेंटिंग्स बनवाना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। मेरा प्रयास रहेगा कि अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सनातन संस्कृति की सुंदरता और आध्यात्मिक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाऊं।”
कलाकार की सफलता में अर्धांगिनी की महत्वपूर्ण भूमिका
पेंटर पीयूष की इस कलात्मक यात्रा में उनकी अर्धांगिनी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वह न केवल पेंटिंग्स के रखरखाव और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं का ध्यान रखती हैं, बल्कि चित्रकारी से संबंधित आवश्यक कार्यों को भी व्यवस्थित करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पीयूष को अपनी कला साधना के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और वह एकाग्र मन से सुंदर एवं उत्कृष्ट आध्यात्मिक चित्रों का निर्माण कर सकें।
**पीयूष की अर्धांगिनी ने कहा, “किसी भी कलाकार की सफलता के पीछे उसकी मेहनत के साथ परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है। मैं प्रयास करती हूं कि पेंटिंग्स की देखभाल से लेकर उनसे जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं ठीक प्रकार से संभाल सकूं, ताकि पीयूष बिना किसी चिंता के अपनी कला पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उनकी बनाई कलाकृतियों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलता है, तो हमें भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। हमारा प्रयास है कि उनकी कला के माध्यम से सनातन संस्कृति और आध्यात्मिकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।”
दक्षिण काली मंदिर परिसर में आध्यात्मिक पेंटिंग्स का यह प्रदर्शन इस बात का संदेश देता है कि कला और आस्था का संगम भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतों का मार्गदर्शन, कलाकार की साधना और परिवार का सहयोग मिलकर प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। पेंटर पीयूष की यह यात्रा आध्यात्मिक कला के माध्यम से सनातन संस्कृति की सेवा और अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक प्रयास है।













