स्वामी मेघानंद सरस्वती ने बताया ध्यान को आत्मिक उन्नति का मार्ग, स्वामी योगानंद ने नियमित योग-साधना अपनाने पर दिया जोर
त्रिलोक वत्स बोले— ध्यान और योग जीवन में सकारात्मकता, एकाग्रता और आत्मानुशासन लाने के सशक्त माध्यम
हरिद्वार। आर्य नगर, ज्वालापुर स्थित पातंजल योगधाम में प्रेस वार्ता आयोजित की गई l 12 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सात दिवसीय ध्यान शिविर का समापन आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। शिविर में शामिल साधकों ने ध्यान, योग-साधना और आत्मचिंतन के महत्व को समझते हुए अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया। शिविर के समापन अवसर पर साधकों को नियमित ध्यान का अभ्यास करने और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में स्वामी मेघानंद सरस्वती, स्वामी योगानंद, अनिल गुप्ता, रामेश्वर वर्गीच और भगत सिंह मंचासीन रहे। इस अवसर पर ध्यान, आध्यात्मिक जागरूकता और संतुलित जीवनशैली के महत्व पर विचार रखे गए।
स्वामी मेघानंद सरस्वती ने कहा कि ध्यान मन की शांति और आत्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम है। आज के तनावपूर्ण वातावरण में ध्यान व्यक्ति को अपने भीतर झांकने, विचारों को समझने और मानसिक संतुलन विकसित करने का अवसर देता है। नियमित ध्यान के अभ्यास से एकाग्रता बढ़ाने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिलती है। उन्होंने साधकों से शिविर में प्राप्त अनुभवों को अपने दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।

स्वामी योगानंद ने कहा कि योग और ध्यान को केवल शिविर या विशेष अवसरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इन्हें जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। नियमित योगाभ्यास और ध्यान से व्यक्ति अपने शरीर, मन और विचारों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मानुशासन, धैर्य और नियमित साधना आध्यात्मिक जीवन की महत्वपूर्ण आधारशिलाएं हैं।

त्रिलोक वत्स ने ध्यान शिविर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ध्यान व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने और अपने भीतर की सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। वर्तमान समय में जब लोग भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली से जूझ रहे हैं, ऐसे में ध्यान शिविर मानसिक शांति, आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने साधकों से योग और ध्यान की इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने की अपील की।
ध्यान शिविर से मिला नियमित साधना का संदेश

सात दिनों तक चले इस शिविर ने साधकों को ध्यान के महत्व को समझने, मन की एकाग्रता बढ़ाने और आध्यात्मिक जीवन के प्रति जागरूक होने का अवसर प्रदान किया। ध्यान व्यक्ति को वर्तमान क्षण में रहने, अपने विचारों के प्रति सजग होने और परिस्थितियों का संतुलित ढंग से सामना करने की प्रेरणा देता है। नियमित अभ्यास से तनाव प्रबंधन और मानसिक कल्याण में भी सहायता मिल सकती है।

समापन अवसर पर पातंजल योगधाम की ओर से सभी साधकों के प्रति स्वागत एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया। शिविर का संदेश रहा कि ध्यान केवल कुछ समय की साधना नहीं, बल्कि स्वयं को समझने, जीवन में संतुलन स्थापित करने और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की निरंतर प्रक्रिया है।
कार्यक्रम में स्वामी मेघानंद सरस्वती, स्वामी योगानंद, अनिल गुप्ता, रामेश्वर वर्गीच और भगत सिंह सहित अन्य साधक उपस्थित रहे l













