इंद्रलोक में वैदिक मंत्रों से गूंजा वातावरण, साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग में उमड़ी आर्य समाज की श्रद्धा
हरिद्वार। आर्य समाज इंद्रलोक, सिडकुल हरिद्वार द्वारा रविवार, 30 अगस्त 2026 को सामुदायिक केंद्र, इंद्रलोक में साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ किया गया। यज्ञ के दौरान “यज्ञों वै श्रेष्ठतमं कर्मः” के वैदिक संदेश के माध्यम से यज्ञ को जीवन का श्रेष्ठतम कर्म बताते हुए समाज को वैदिक संस्कारों और सद्कर्मों से जोड़ने का आह्वान किया गया।
साप्ताहिक यज्ञ के यजमान चौधरी मुख्तयार सिंह, श्रीमती कृष्णा एवं सत्यम जी सपरिवार यज्ञ में सम्मिलित हुए। यज्ञ का विधि-विधान एवं पौरोहित्य चौधरी देवपाल सिंह राठी जी ने संपन्न कराया। वैदिक मंत्रोच्चार एवं आहुतियों से सामुदायिक केंद्र का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात चौधरी देवपाल सिंह राठी ने यजमान परिवार को शुभाशीर्वाद प्रदान किया तथा उनके जीवन, कर्म और पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए वैदिक जीवन-पद्धति अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण शुद्धि, आत्मिक उन्नति और समाज में सद्भाव की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है।
कार्यक्रम के अंत में आर्य समाज के नियमों का पाठ किया गया तथा विधिवत शांति पाठ के साथ यज्ञ-सत्संग का समापन हुआ। इसके बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर श्री नरेंद्र सिंह तेवतिया, देवपाल सिंह राठी, महेश चंद्र गुप्ता, रेणु राजपूत, कुलबीर सिंह, डॉ. ए.के. गुप्ता, जसवती, मुख्तयार सिंह, कृष्णा, सत्यम, एम.पी. सिंह, विद्या प्रसाद, अरुण कुमार, तानिया, दिशा, विनीत सचदेवा सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आर्य समाज इंद्रलोक द्वारा आयोजित इस साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग ने उपस्थित लोगों को वैदिक संस्कृति, संस्कार और श्रेष्ठ कर्म करना का आहवान किया l
“यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है” के संदेश से गूंजा इंद्रलोक—आर्य समाज ने वैदिक परंपरा के साथ किया साप्ताहिक यज्ञ-सत्संग













