हरिद्वार (कमल शर्मा)।
भूपतवाला स्थित सप्तऋषि रोड के प्रसिद्ध श्री उत्कल आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर में विशाल संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं भक्तों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर गुरु चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु पूजन एवं आरती के साथ हुआ। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भजन-कीर्तन और सत्संग का आनंद लिया।
आश्रम के परमाध्यक्ष श्री वल्लभाचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले दिव्य प्रकाश हैं। गुरु के सान्निध्य में ही मनुष्य का अज्ञान दूर होता है और वह सत्य, सेवा तथा संस्कारों के मार्ग पर अग्रसर होता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महान अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलकर समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देना चाहिए।
समारोह के उपरांत संत-महात्माओं का सम्मान किया गया तथा सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।










