हरिद्वार। भूपतवाला स्थित कमल दास कुटिया ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास श्री शिव प्रकाश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि सच्ची मित्रता न धन-दौलत देखती है और न ही पद-प्रतिष्ठा, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण ही उसका वास्तविक आधार हैं। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
उन्होंने परीक्षित मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य कला सिखाने वाला अमृत है। जो श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका श्रवण करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। कथा के समापन पर उन्होंने संपूर्ण श्रीमद्भागवत का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान का स्मरण, सत्संग, सेवा और सदाचार ही मानव जीवन को सफल बनाते हैं।
इस अवसर पर कमल दास कुटिया ट्रस्ट के महंत श्री ओम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज में प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के संस्कारों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत करना है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री अजय गौतम ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और संस्कारों की नई ऊर्जा का संचार किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं। उन्होंने सभी भक्तों से धर्म, सेवा और मानव कल्याण के कार्यों में निरंतर सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भजन-कीर्तन और जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन हुआ
सुदामा की सच्ची मित्रता और परीक्षित मोक्ष का संदेश, श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर श्रद्धालुओं की आंखें हुईं नम










