कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ, भागवत महात्म्य और धुंधकारी प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर


कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ, गोकर्ण–धुंधकारी की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु


हरिद्वार (कमल शर्मा)। श्री कमल दास कुटिया ट्रस्ट, सप्तऋषि–भूपतवाला रोड, हरिद्वार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का बुधवार को भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और जय श्रीराम तथा राधे-राधे के जयघोष के बीच निकली कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में भाग लेकर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।


इस अवसर पर महंत श्री ओमप्रकाश शास्त्री जी ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा समाज में संस्कार, सद्भाव और धर्म के प्रति आस्था जागृत करने का सशक्त माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार सहित कथा श्रवण कर अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करनी चाहिए।

” वहीं ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री अजय गौतम ने कहा कि “यह आयोजन जन-जन में सनातन संस्कृति के मूल्यों को स्थापित करने का एक पावन प्रयास है। भागवत कथा से मिलने वाली प्रेरणा समाज को नैतिकता, सेवा और सदाचार की राह पर अग्रसर करती है।”


कथा के प्रथम दिवस पर अंतरराष्ट्रीय कथा व्यास श्री शिवप्रकाश शास्त्री जी महाराज ने भगवान की वंदना एवं श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक के उच्चारण के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने श्रीमद्भागवत महात्म्य, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की उत्पत्ति तथा गौकर्ण और धुंधकारी की प्रेरणादायी कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


कथा व्यास ने बताया कि धुंधकारी अपने दुष्कर्मों, लोभ, मोह और कुसंगति के कारण प्रेत योनि को प्राप्त हुआ। उसके उद्धार के लिए उसके धर्मनिष्ठ भाई गौकर्ण ने श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। सात दिनों तक कथा श्रवण के प्रभाव से धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली और उसे दिव्य लोक की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग इस बात का जीवंत प्रमाण है कि श्रीमद्भागवत कथा में मनुष्य के जीवन को ही नहीं, बल्कि मृत आत्मा के कल्याण का भी अद्भुत सामर्थ्य है। कथा श्रद्धा, भक्ति और सत्कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

इस अवसर पर बोलते हुए आयोजक अजय गौतम ने कहा की “श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य प्रकाश है। जो श्रद्धापूर्वक भागवत कथा का श्रवण करता है, उसका जीवन सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।”


22 से 28 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ में प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, सनातन धर्म के आदर्शों, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अमृतमय वर्णन किया जाएगा। कथा के साथ प्रतिदिन भजन-कीर्तन, आरती एवं प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई है।
आयोजकों ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कर इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया।


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