हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में हाल ही में समानांतर कार्यकारिणी के गठन को लेकर चल रहे विवाद पर परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। गुवाहाटी में आयोजित अंबुबाची मेले से लौटने के बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखाड़ा परिषद में किसी नए चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राचीन परंपराओं और नियमावली के अनुसार संचालित वास्तविक अखाड़ा परिषद वही है, जिसके वे निर्वाचित अध्यक्ष हैं।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि वे लंबे समय से गुवाहाटी प्रवास पर थे, इसलिए इस विषय पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से ही परिषद में दो गुट बने हुए हैं, जबकि उनका चुनाव दो माह पूर्व उज्जैन में सर्वसम्मति से संपन्न हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि धर्म, संत समाज और कुंभ जैसे आयोजनों के लिए निरंतर कार्य करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद की नियमावली के अनुसार चुनाव कराने का अधिकार केवल परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज को है। यदि किसी पदाधिकारी का निधन हो जाए अथवा कोई पद रिक्त हो, तभी उस विशेष पद के लिए चुनाव कराया जाता है। पूरी कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन करना परिषद के नियमों के विरुद्ध है, इसलिए समानांतर कार्यकारिणी का कोई वैधानिक अस्तित्व नहीं है।
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ों का उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा करना है और संत समाज आपसी मतभेदों के बावजूद एक परिवार की तरह है। उन्होंने कहा कि विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन इससे सनातन धर्म की सेवा और अखाड़ों की एकता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आगाह किया कि यदि कोई भी समूह मनमाने ढंग से स्वयं को परिषद का अध्यक्ष या पदाधिकारी घोषित करने लगेगा तो इससे अनुशासनहीनता बढ़ेगी और भविष्य में अखाड़ों की परंपरागत व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आगामी कुंभ मेलों को लेकर उन्होंने कहा कि उज्जैन में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया जा चुका है कि हरिद्वार, नासिक और उज्जैन के आगामी कुंभ मेले परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी और महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी महाराज के नेतृत्व में ही संपन्न होंगे। इन आयोजनों के सफल संचालन के बाद ही परिषद के अगले चुनावों पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य आगामी हरिद्वार कुंभ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक बनाना है तथा संत समाज की एकता और सनातन परंपराओं को सुदृढ़ बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अखाड़ा परिषद में समानांतर कार्यकारिणी अवैध,चुनाव कराने का अधिकार केवल महामंत्री को, हरिद्वार सहित आगामी कुंभ हमारे नेतृत्व में ही होंगे





