“आज रात हरिद्वार में अवैध खनन की आशंका,”पूर्व सूचना के बावजूद खनन हुआ तो अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई की मांग, कई क्षेत्रों में पुलिस तैनाती और निगरानी बढ़ाने की अपील”

विश्वसनीय सूत्रों से बड़े पैमाने पर अवैध खनन की पुख्ता सूचना – यदि आज रात्रि खनन हुआ तो प्रशासनिक अधिकारियों, खनन विभाग एवं संरक्षण देने वाले व्यक्तियों पर सीधे अवमानना की कार्यवाही की जाएगी

हरिद्वार, दिनांक: 06 जुलाई, 2026

मातृ सदन को अत्यंत विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्थानीय सूत्रों से पुख्ता सूचना प्राप्त हुई है कि आज रात्रि जनपद हरिद्वार के ग्राम महतोली, भुवापुर, बाड़ीटीप, नेहंदपुर, प्रतापपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में स्थित विभिन्न स्टोन क्रेशरों पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन कराया जाना प्रस्तावित है और इसकी समस्त तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।

प्राप्त सूचनाओं के अनुसार दर्जनों जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, डंपर एवं भारी वाहन पहले से ही एकत्रित कर लिए गए हैं और उन्हें खनन क्षेत्रों की ओर भेजा जा रहा है। सूचना यह भी है कि इस अवैध खनन को संचालित करने के लिए स्टोन क्रेशर संचालकों तथा कथित रूप से संरक्षण देने वाले लोगों के बीच बैठकों का दौर चल चुका है, जिनमें हरिद्वार और देहरादून में बैठकें आयोजित किए जाने की भी जानकारी प्राप्त हुई है।

मातृ सदन के संज्ञान में यह भी आया है कि स्वामी यतीश्वरानन्द, जो खनन माफियाओं के सरदार हैं व श्री पुष्कर सिंह धामी के लिए हरिद्वार में खनन की उगाही करते हैं, का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुखता से सामने आ रहा है। इसी प्रकार श्री आदेश चौहान के संबंध में भी विश्वसनीय सूत्रों द्वारा जानकारी दी गई है कि वे स्टोन क्रेशर संचालकों के साथ बैठकों में शामिल रहे हैं। इसके अतिरिक्त श्री काज़िम रज़ा खान, जो हरिद्वार के महा भ्रष्ट खनन अधिकारी रहे हैं व जिनका हरिद्वार से स्थानांतरण हो चुका है, के बारे में भी यह सूचना प्राप्त हुई है कि वे कथित रूप से इस पूरे प्रकरण में समन्वय एवं संपर्क स्थापित करने की भूमिका निभा रहे हैं क्यूंकि ये क्रशिंग माफियाओं के चहेते हैं। लिमरा स्टोन क्रशर मालिक से इनकी विशेष साँठ-गांठ रही है। एक अन्य व्यक्ति, जो स्वयं को राजेन्द्रानन्द सरस्वती बताता है और जिसका मूल निवास मेरठ बताया जा रहा है, का नाम भी इस अवैध खनन के संबंध में लगातार सामने आया है।

मातृ सदन स्पष्ट करती है कि उपर्युक्त व्यक्तियों के नाम विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त सूचनाओं एवं क्षेत्र में व्यापक रूप से चल रही चर्चाओं के आधार पर सामने आए हैं। यदि इन सूचनाओं में सत्यता है, तो यह न केवल अवैध खनन का मामला है, बल्कि कानून के शासन तथा न्यायालयों के आदेशों को खुली चुनौती देने का मामला है।

मातृ सदन ने इस गंभीर सूचना से तत्काल जिलाधिकारी हरिद्वार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार, जिला खनन अधिकारी तथा संबंधित थाना प्रभारियों को अवगत करा दिया है। अब किसी भी अधिकारी के लिए यह कहने का कोई अवसर नहीं बचेगा कि उन्हें पूर्व सूचना नहीं थी।

यदि आज रात्रि या आगामी घंटों में इन क्षेत्रों में अवैध खनन होता है, तो यह मानने के पर्याप्त आधार होंगे कि संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने जानबूझकर अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया अथवा अवैध खनन को रोकने में घोर लापरवाही बरती व इसमें इनकी सीधी संलिप्तता है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं अन्य न्यायिक मंचों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यदि पूर्व सूचना के बाद भी अवैध खनन होने दिया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना तथा अन्य उपलब्ध कानूनी कार्यवाहियों के लिए वे स्वयं उत्तरदायी होंगे।

मातृ सदन प्रशासन से तत्काल मांग करती है कि—
तत्काल प्रभाव से महतोली, भुवापुर, बाड़ीटीप, नेहंदपुर, प्रतापपुर एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल एवं मजिस्ट्रेटों की तैनाती की जाए;
सभी जेसीबी, पोकलैंड मशीनों एवं संदिग्ध वाहनों को तत्काल जब्त किया जाए;
सभी स्टोन क्रेशरों की रात्रिकालीन वीडियोग्राफी एवं निगरानी कराई जाए;
अवैध खनन को संरक्षण देने वाले किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति के विरुद्ध निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की जाए।

मातृ सदन स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहना चाहती है कि गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की हत्या, पर्यावरणीय कानूनों का खुलेआम उल्लंघन और खनन माफियाओं का तांडव अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि आज रात्रि अवैध खनन हुआ, तो इसे प्रशासन की विफलता मात्र नहीं, बल्कि कानून के शासन के समक्ष आत्मसमर्पण माना जाएगा और मातृ सदन इस विषय को जनआंदोलन, न्यायिक हस्तक्षेप, अवमानना कार्यवाही तथा अन्य सभी वैधानिक उपायों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा।

प्रशासन के पास अभी भी समय है। या तो वह कानून का शासन स्थापित करे, या फिर अवैध खनन होने की स्थिति में उसके लिए न्यायालय के समक्ष जवाबदेह होने के लिए तैयार रहे।

— मातृ सदन, हरिद्वार

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