हरिद्वार (कमल शर्मा)। भूपतवाला स्थित दशनाम आश्रम में श्री लटियाल माता सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। कथा के सातवें दिवस पर जोधपुर (राजस्थान) से पधारी पूज्या संत तारा देवी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं का रसपान कराते हुए सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष के अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा के दौरान पूज्या तारा देवी जी ने कहा कि सुदामा चरित्र हमें सच्ची मित्रता, निस्वार्थ भक्ति और भगवान पर अटूट विश्वास का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों के प्रेम के आगे स्वयं को भी समर्पित कर देते हैं। वहीं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मनुष्य को जीवन के अंतिम क्षणों में भी मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है।

कथा श्रवण के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे और पूरा पंडाल “राधे-राधे” तथा “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर विश्व कल्याण एवं मानवता की सुख-समृद्धि की कामना की।
श्रद्धालु नवरत्न दवे ने कहा कि “श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला आध्यात्मिक महायज्ञ है। पूज्या तारा देवी जी की वाणी से कथा सुनकर मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।”

भक्त पूर्णा बोहरा कहा कि “सुदामा चरित्र का प्रसंग हमें विनम्रता, मित्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। ऐसी कथाएं समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करती हैं।”
पूर्व पार्षद फलौदी राजस्थान एवं समाजसेवी अशोक वोहरा ने कहा कि “भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। इस अवसर पर बोलते हुए श्रद्धालु भक्त संतोष बोहरा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है तथा नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।”

इस अवसर पर मीना बोहरा सरस्वती बोहरा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कथा के समापन दिवस पर अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया।





