हरिद्वार (कमल शर्मा)। दशनाम आश्रम, भूपतवाला, हरिद्वार में लटियाल माता सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं गंगा स्नान महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालु भक्ति और उल्लास के वातावरण में सराबोर हो उठे। कथा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य (जन्मोत्सव) एवं उनकी मनमोहक बाल लीलाओं का श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

कथा वाचिका तारा देवी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, वसुदेव द्वारा उन्हें गोकुल पहुंचाने, नंदोत्सव तथा बाल्यकाल की विभिन्न दिव्य लीलाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और भक्तों के कल्याण के लिए हुआ था। श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं हमें प्रेम, करुणा और निष्काम भक्ति का संदेश देती हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और आनंद का संचार होता है।

मुख्य यजमान श्री नवरत्न दवे धर्मपत्नी राधा देवी, पूर्णा जी बोहरा एवं भवानी शंकर जी बोहरा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री नवरत्न दवे ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। कथा श्रवण से मन को शांति और जीवन को सही दिशा मिलती है। ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का प्रसार होता है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई, जिस पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोषों के साथ उत्साहपूर्वक जन्मोत्सव मनाया। पूरा पंडाल भक्ति गीतों और संकीर्तन से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिला भक्तगण एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने कथा के उपरांत गंगा स्नान एवं प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।





