हरिद्वार (कमल शर्मा)। कनखल स्थित श्री शिव शक्ति धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचिका पूज्या राधा प्रिया जी ने भगवान श्रीकृष्ण की मथुरा लीलाओं, अत्याचारी कंस के वध तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरे परिसर में जय श्रीकृष्ण के जयघोष गूंज उठे।
कथा वाचिका राधा प्रिया जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सदैव धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लिया। उन्होंने मथुरा पहुंचकर अत्याचारी कंस का वध कर जनता को भय और अत्याचार से मुक्त कराया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी जी की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट श्रद्धा, समर्पण और निष्कलंक प्रेम ही उन्हें प्रभु से मिलाने का माध्यम बना। भगवान ने रुक्मिणी जी का हरण कर उनसे विवाह किया और यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति, दृढ़ विश्वास और निष्काम प्रेम से ईश्वर अवश्य प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने कहा कि रुक्मिणी विवाह केवल एक वैवाहिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। जिस प्रकार रुक्मिणी जी ने सभी बाधाओं को त्यागकर भगवान को अपना सर्वस्व माना, उसी प्रकार मनुष्य को भी संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर प्रभु की शरण ग्रहण करनी चाहिए।
कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति की। संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने कथा से प्राप्त शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रुक्मिणी हरण से कंस वध तक गूंजी श्रीकृष्ण महिमा, धर्म की विजय का संदेश देकर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु




