सती के आत्मदाह और माता पार्वती जन्म प्रसंग से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

हरिद्वार(कमल शर्मा),पावन पुरुषोत्तम मास के अवसर पर भूपतवाला रोड स्थित जयपुरिया यात्री निवास में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के चौथे दिवस में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता सती के अद्भुत प्रसंगों का रसपान कर भावविभोर हो गए। कथा व्यास पूज्य भागवताचार्य पंडित श्री जय गोपाल जी शास्त्री ने अपनी मधुर वाणी में सती के आत्मदाह, भगवान शिव के वैराग्य तथा हिमालय पुत्री माता पार्वती के अवतरण का मार्मिक वर्णन किया l

कथा के दौरान पंडित श्री जय गोपाल जी शास्त्री ने कहा कि माता सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन न कर यज्ञ अग्नि में आत्मदाह कर सनातन धर्म में पति सम्मान और आत्मस्वाभिमान की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अहंकार में डूब जाता हैl

तो उसका पतन निश्चित हो जाता है। दक्ष प्रजापति का अहंकार भी उनके विनाश का कारण बना।उन्होंने बताया कि माता सती के वियोग में भगवान शिव वैराग्य धारण कर समाधि में लीन हो गए और सम्पूर्ण सृष्टि शोकमग्न हो उठी। इसके पश्चात जगत कल्याण हेतु माता सती ने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लेकर पुनः भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की।

कथा के इन प्रसंगों को सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं तथा पूरा पंडाल “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।आयोजक श्री गोविंद लाल सोनी ने कहा कि देवभूमि हरिद्वार में शिवमहापुराण कथा का आयोजन करना परिवार के लिए सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और शिव भक्ति का संदेश प्रसारित हो रहा है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।कथा के दौरान भजन-कीर्तन पर श्रद्धालु झूम उठे तथा भगवान शिव की भक्ति में सराबोर दिखाई दिए l

कथा स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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