हरिद्वार। भूपतवाला स्थित कमलदास कुटिया में गुरुवार को आयोजित भव्य दीक्षा समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हो गया। परम पूज्य गद्दीनशीन महन्त ओमप्रकाश शास्त्री जी महाराज की पावन अध्यक्षता में गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए व्यास सुनील पाण्डेय को नाम दीक्षा प्रदान कर विधिवत शिष्य बनाया गया।समारोह में विभिन्न अखाड़ों एवं आश्रमों से पधारे संत-महात्माओं, महन्तों एवं महामण्डलेश्वरों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नवदीक्षित शिष्य को आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर संतों ने अपने आशीर्वचनों में गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का वर्णन करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरे आश्रम परिसर में भक्ति एवं उत्साह का वातावरण बना रहा। संतों के उद्बोधन के पश्चात विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।महन्त ओमप्रकाश शास्त्री जी महाराज ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है,

जिसके माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान एवं संस्कारों का प्रवाह पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। वहीं स्वामी सुनील पाण्डेय ने अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जीवनभर सनातन धर्म एवं मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कैबिनेट मंत्री सतपाल ब्रह्मचारी ने समारोह को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणादायी आयोजन बताते हुए कहा कि भारत की महान गुरु-शिष्य परंपरा ही हमारी सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक शक्ति का आधार है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था मजबूत होती है।

मंत्री सतपाल ब्रह्मचारी ने नवदीक्षित शिष्य को शुभाशीष देते हुए कहा कि गुरु कृपा से जीवन का मार्ग प्रकाशित होता है और मानव सेवा ही सच्ची साधना है।समारोह के सफल आयोजन पर कमलदास कुटिया परिवार ने सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।



