जननायकों के बलिदान और शौर्य को स्मरण कराता दिन हैं जनजातीय गौरव दिवस: प्रो बत्रा

भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा ज्ञान पद्धति का अभिन्न अंग हैं जनजातियाँ: प्रो बिष्ट

जननायकों के बलिदान और शौर्य को स्मरण कराता दिन हैं जनजातीय गौरव दिवस: प्रो बत्रा

भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयन्ती पर किया उन्हें नमन

15 नवम्बर 2025
हरिद्वार।
एस. एम. जे. एन. पी. जी. कॉलेज, हरिद्वार में आज आतंरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा उत्तराखंड स्थापना रजत जयन्ती उत्सव की श्रंखला में जनजातीय गौरव दिवस पर टाउन हॉल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो सुनील कुमार बत्रा ने भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयन्ती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि जनजातीय गौरव दिवस जननायकों के बलिदान और शौर्य को स्मरण कराता दिन हैं। प्रो बत्रा ने कहा कि जनजातियों में अनेकों ऐसे जननायक हुए हैं जिनका भारत की स्वाधीनता में महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं। आज आवश्यकता हैं कि हमारी युवा पीढ़ी उन जननायको के विषय में जान सके। प्रो बत्रा ने कहा कि अखाड़ो में जिन मणियों से अखाड़े की परिकल्पनाबनती है वो भी जनजातियों का ही एक स्वरूप होती हैं। उन्होंने बताया कि भगवान रामचंद्र को बना हुआ आज के समय हैं विभिन्न आदिवासी एवं जनजातियों का सहयोग प्राप्त हुआ था जिसमें मुख्य रूप से निशाद राज ,भिवंडी ,एवं वानर आदि प्रमुख थे इस अवसर पर मुख्य अतिथि तथा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रो भगवान सिंह बिष्ट ने कहा कि जनजातियाँ भारत की सामजिक, सांस्कृतिक विरासत तथा ज्ञान पद्धति की पृष्ठभूमि रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में सामाजिक जागरूकता बढ़ाकर आदिवासी संस्कृतियों के संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सकता है तथा साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार लाकर भारत की विकास यात्रा में एकीकृत कर सकते हैं।
इस अवसर कर कार्यक्रम के संयोजक समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो जे सी आर्य ने कहा कि जनजातियों का योगदान बहुआयामी रहा हैं, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना, भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को समृद्ध करना, पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण करना, और पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से कृषि पद्धतियों को विकसित करना शामिल है। इस अवसर पर आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक तथा छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ संजय कुमार माहेश्वरी ने सफल कार्यक्रम की बधाई देते हुए कहा कि जनजातियों ने अपनी कला, शिल्प और हस्तशिल्प के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है और आज भी जनजातियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा और विकासात्मक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ सुषमा नयाल ने किया।
इस अवसर पर प्रो विनय थपलियाल, डॉ शिवकुमार चौहान, डॉ मनोज कुमार सोही, डॉ वंदना सिंह, डॉ सरोज शर्मा, डॉ विनीता चौहान, डॉ पुनीता शर्मा, डॉ पदमावती तनेजा, डॉ गीता शाह, रिंकल गोयल, योगेश्वरी, ऋचा मिनोचा, रुचिता सक्सेना, विनीत सक्सेना, हरीश जोशी, निशांत चौहान डॉक्टर आशा शर्मा डॉक्टर मोना शर्मा डॉक्टर लता शर्मा विजय शर्मा आदि सहित अनेक छात्र छात्राये उपस्थित रहे।

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