बड़े धूमधाम से मनाई गईं परम पूज्य स्वामी श्री हंसदेवाचार्य जी महाराज की सप्तम पावन पुण्य तिथि

कमल शर्मा (हरिहर समाचार)

हरिद्वार,जगन्नाथ धाम ट्रस्ट भीमगोडा, के तत्वाधान में साकेतवासी परम पूज्य श्रीमज्जगद्‌गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी श्री हंसदेवाचार्य जी महाराज की सप्तम पावन पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में श्रीराम चरित्र मानस पाठ एवं विशाल भंडारे का हुआ आयोजन इस अवसर पर बोलते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी अरुण दास जी महाराज ने कहा कि कहागुरु के चरणों की रज मनुष्य को बड़े ही दुर्लभ सौभाग्य से प्राप्त होती है, क्योंकि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाली दिव्य चेतना होते हैं। गुरु का सान्निध्य वही प्राप्त करता है, जिसके जीवन में पूर्व जन्मों के पुण्य संस्कार जाग्रत हो चुके होते हैं।

गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करते हैं और शिष्य को सत्य के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। सतगुरुदेव इस पृथ्वी लोक पर साक्षात ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होकर मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं और उसे आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन मनुष्य को सही और गलत का भेद सिखाता हैl

तथा उसे जीवन की प्रत्येक परीक्षा में धैर्य और विवेक से आगे बढ़ना सिखाता है। गुरु की कृपा से मनुष्य का आचरण शुद्ध होता है, विचार पवित्र होते हैं और कर्म श्रेष्ठ बनते हैं। गुरु अपने शिष्यों को केवल विद्या ही नहीं देते, बल्कि उन्हें संस्कार, संयम, सेवा, करुणा और सत्य का पाठ भी पढ़ाते हैं। जिस मनुष्य के जीवन में गुरु का आशीर्वाद होता है, उसके मार्ग के सभी विघ्न धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं और उसका जीवन सुगम बन जाता है l

इस अवसर पर बोलते हुए श्री विष्णु दास महाराज ने कहा कि गुरु अपने शिष्यों का लोक और परलोक दोनों सुधार देते हैं और उनके जीवन को सार्थक, पवित्र तथा मंगलमय बना देते हैं। इसलिए गुरु का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है और गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण ही मनुष्य को सच्ची सफलता और शांति प्रदान करता है। इस अवसर पर अनेकों आश्रम मठ मंदिरों से आये संत महापुरुष तथा भारी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे सभी ने आयोजित भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया

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