🔥 गुरु कृपा की दिव्य वर्षा में डूबा ऋषिकेश — महंत बाबा भगवान गिरी महाराज की 40वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा का सागर 🔥
ऋषिकेश स्थित सिद्धपीठ श्री श्री 1008 बाबा भगवान गिरी आश्रम (पंजाब वाले आश्रम) में प्रतः स्मरणीय, साक्षात् परमात्मा स्वरूप श्री 1008 महंत बाबा भगवान गिरी महाराज की 40वीं पावन पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप में संपन्न हुई। यह दिव्य आयोजन आश्रम के पूज्य महंत श्री भूपेंद्र गिरी जी महाराज के पतित-पावन सान्निध्य में हर्षोल्लास और गरिमामयी वातावरण में आयोजित किया गया।

प्रातः काल से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा वातावरण वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन, गुरु वंदना और संतों के दिव्य प्रवचनों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा भंडारे और सत्संग में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
इस पावन अवसर पर संत-महापुरुषों ने गुरु महिमा और सनातन परंपरा की गरिमा पर अपने अमृतमय विचार प्रस्तुत किए। पूज्य महंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि गुरु की पावन स्मृतियां न केवल हृदय को श्रद्धा से भरती हैं, बल्कि भाग्य का उदय भी करती हैं। गुरु कृपा से ही मनुष्य ज्ञान, दान, धर्म और सत्कर्म के मार्ग पर अग्रसर होता है।

वहीं महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिन भक्तों को गुरु चरणों की शरण प्राप्त होती है, उनके जन्म-जन्मांतरों के पुण्य जागृत हो जाते हैं। गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि आत्मा को परम सत्य से जोड़ने वाले दिव्य सेतु हैं।
पूज्य महंत मोहन सिंह महाराज ने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। संत इस धरती पर ईश्वर की सजीव अभिव्यक्ति हैं, जिनके आशीर्वाद से मनुष्य के कष्ट और अज्ञान दूर हो जाते हैं।

आश्रम के पूज्य महंत भूपेंद्र गिरी जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि अनेक जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप ही मनुष्य को गुरु की शरण प्राप्त होती है। गुरु ही जीवन को प्रकाशमान करते हैं और धर्म, भक्ति व आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि जहां संतों का सान्निध्य होता है, वहीं साक्षात् ईश्वर का वास होता है।

समारोह के दौरान भजन-कीर्तन, हवन-पूजन, गुरु वंदना और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरा आश्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।
इस पावन अवसर पर महंत तीरथ सिंह महाराज, महंत मोहन सिंह महाराज, महंत शुभम गिरी महाराज, महंत केशवानंद महाराज, महंत दुर्गादास महाराज, महंत प्रहलाद दास महाराज, श्री महंत बलवंत सिंह महाराज, महंत रवि पुरी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

यह भव्य पुण्यतिथि समारोह गुरु परंपरा, संत महिमा और सनातन संस्कृति की गौरवशाली विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।



