कमल शर्मा
दिनांक- 27 फरवरी, 2026
सतरंगी काव्य गोष्ठी के बीच गीतिका संग्रह ‘नवल विभा’ का विमोचन
‘इन्द्र धनुष के रंगों में रंगा है मेरा मन’
साहित्यिक नगरी में बदल रही है, धर्मनगरी- डाॅ० शिव शंकर जायसवाल
हरिद्वार। “धर्मनगरी हरिद्वार अब धीरे-धीरे कला और संस्कृति के साथ-साथ बहुत गति के साथ ‘साहित्यिक नगरी’ का रूप लेती जा रही है। इस दिशा में साहित्यकार काफी कार्य कर रहे हैं, लेकिन अभी इस ओर बहुत कुछ करना बाकी है।” यह विचार हरिद्वार के लोकप्रिय कवि, काव्य छंद व्याकरण के जानकार तथा परिक्रमा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के सचिव शशि रंजन ‘समदर्शी’ के गीतिका संग्रह ‘नवल विभा’ के विमोचन समारोह तथा कवि गोष्ठी में एस०एम०जे०एन० पी०जी० कालेज के पूर्व प्राचार्य तथा कवि डा० शिव शंकर जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन करते हुये व्यक्त किये। कवि की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि- “साहित्य एक अनुभव का विषय है, एक साहित्यकार का अनुभव जितना विषद होता है, उसकी कविताएँ उतनी ही प्रभावी होती हैं।”

देर शाम तक चले इस कार्यक्रम का आयोजन परिक्रमा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की ओर से भेल के सेक्टर-2 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के विशाल माधव सभागार में किया गया था। पुस्तक के विमोचन समारोह के बाद एक सबरंग काव्य गोष्ठी आयोजित की गयी, जिसमें नगर की लगभग सभी साहित्यिक संस्थाओं से सम्बद्ध वरिष्ठ एवं युवा कवियों के अपनी-अपनी विधाओं में सरस एवं ओजस्वी कविताओं व गीतों का पाठ कर तालियाँ बटोरी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भेल के महाप्रबन्धक डाॅ० नागेन्द्र प्रसाद राय तथा बागपत से पधारे छंद विशेषज्ञ मनोज मानव तथा लोकेन्द्र दत्त अंथवाल ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ कवि पं० ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ‘दिव्य’ ने उपस्थित रचनाकारों को गीतिका छंद की बारीकिया समझाईं। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का संचालन मदन सिंह यादव तथा कवि गोष्ठी का संचालन चेतना पथ के सम्पादक तथा गीतकार अरुण कुमार पाठक ने किया।

माँ सरस्वती तथा माँ भारती के चित्रों के सम्मुख दीप प्रज्जवलन, माल्यार्पण व पुष्पार्पण तथा सुश्री अभिज्ञा रंजन द्वारा प्रस्तुत श्री गणेश वंदना के साथ प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ सभी आमंत्रित कविगण ने शशि रंजन को उनकी पुस्तक के विमोचन पर बधाई एवं शुभकामनाएँ भेंट कीं। वरिष्ठ कवि व समीक्षक साधुराम पल्लव तथा डाॅ० सुशील कुमार त्यागी ने विमोचित पुस्तक ‘नवल विभा’ की समीक्षा की। पुस्तक के रचयिता शशि रंजन ‘समदर्शी’ पुस्तक ‘नवल विभा’ से गीतिका वाचन किया। ‘नवल विभा प्रकाशन’ की प्रमुख विभा चौधरी ने प्रकाशक की ओर से सभी का स्वागत किया तथा मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों को शाल, प्रतीक चिन्ह तथा रुद्राक्ष माला के साथ सम्मनित करने के साथ-साथ समीक्षकों- डाॅ० सुशील कुमार त्यागी तथा साधुराम पल्लव के साथ ही कार्यक्रम संयोजक अरुण कुमार पाठक को प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर कविता पाठ करते हुए वरिष्ठ गीतकार भूदत्त शर्मा ने ‘है अमृत की धारा जिसे कहते हैं गंगा’ के साथ माँ गंगा को नमन किया। अरुण कुमार पाठक होली हास्य ‘हुड़दंगी लाल होली के बहुत शौकीन थे’, शशि रंजन ‘समदर्शी’ ने गीतिका ‘बिन मांगे ही कितनी खुशियाँ रंगों में भर लाती होली’, वरिष्ठ कवि ब्रजेन्द्र हर्ष ने गीत ‘कितने सपने होते अपने, कितने प्रहर निसार रहे हैं’, कंचन प्रभा गौतम ने ‘इन्द्र धनुष के रंगों में रंगा है मेरा मन’, सुमन पंत ‘सुरभि’ ने ‘आया वसंत फिर से हे सखी मन में उमंग फिर जागी है’ अभिनन्दन अभिरसमय ने गीत- बेदाग़ मुहबब्त पे कोई दाग़ ना आये’, महेन्द्र माही ने गीत ‘ढूँढता हूँ किस जगह है, आदि का आनन्द मेरा’, जोश के युवा कवि अरविन्द दुबे ने बहुत पा लिया है सबर कीजियेगा’, वृंदा शर्मा ने काव्य में कृष्णार्जुन संवाद ‘कुरुक्षेत्र की उस माटी में, जब भीषण रण का पहरा था’, बृजेन्द्र हर्ष ने गीत ‘फागुन की मदमस्त हवा में गोते खाते गहरे’, मदन सिंह यादव ने ‘भारत माता का हब सब पर कोटि कोटि उपकार है’, देबाश्री चक्रबर्ती ने ‘नारी तो वो हवा है, जो नीम-नीम बहे’ तथा बंदना झा ने ‘नारी तू नारायणी’, डाॅ० सुगन्ध पांडे ने युद्ध विभीषिका की परिभाषा, आशा पर है घोर निराशा’, रवीना राज ने ‘सिक्के चाँदी से अधिक जिसका प्यार हो, हमसफर उतना वफ़ादार हो’ तथा सुमन भारद्वाज ने गीत ‘इस बज़्म की रंगीनियों की क्या बात है’ सुनाकर गोष्ठी में नवरस संचार किया।
गोष्ठी में अभिज्ञा रंजन, डाॅ० नीता नय्यर ‘निष्ठा’, आशा साहनी, राजकुमारी ‘राजेश्वरी’, डॉ अशोक गिरि, मीनाक्षी चावला, कर्मवीर सिंह, तुषार कांत पांडे, कविता जैन, देवेन्द्र मिश्र, साधुराम पल्लव, डाॅ० सुशील कुमार त्यागी ‘अमित’ तथा डाॅ० प्रशांत कौशिक आदि ने भी कविता पाठ कर वाह वाही लूटी।
कार्यक्रम में दीपशिखा साहित्य मंच की अध्यक्ष डाॅ० मीरा भारद्वाज, संस्कार भारती हरिद्वार इकाई के सचिव सन्तोष साहू, श्वेतांशु रंजन, अमित कुमार ‘मीत’, अन्तःप्रवाह सोसाइटी के संजय हांडा, अपराजिता ‘उन्मुक्त’, दिव्यांश ‘दुष्यन्त’, अभिषेक भारद्वाज आदि भी उपस्थित रहे।
