हरिद्वार में गुरु स्मृति महोत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सागर, संत भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद


कमल शर्मा/हरिद्वार। श्री रघुवीर भवन, श्रवण नाथ नगर में साकेतवासी परमात्मा स्वरूप प्रातः स्मरणीय महंत दयाराम दास जी महाराज की पावन स्मृति में दशम स्मृति महोत्सव एवं विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर संत-महापुरुषों, श्रद्धालुओं और भक्तजनों की बड़ी संख्या उपस्थित रही।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय गुरु भगवान श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने गुरु महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि गुरु स्मृति महोत्सव श्रद्धा, समर्पण और दिव्य प्रेम का अनुपम संगम है। यह वह पावन अवसर है जब शिष्य अपने सतगुरु की स्मृतियों को हृदय में संजोकर उनके श्रीचरणों में कृतज्ञता अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर ईश्वर की करुणा का साकार स्वरूप हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। सतगुरु की कृपा के बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं, क्योंकि वही आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाले पावन सेतु हैं।
आश्रम के महंत श्री प्रमोद दास जी महाराज ने कहा कि उत्तराखंड की पावन भूमि हरिद्वार सदैव से अध्यात्म और साधना की तपोस्थली रही है। गुरु दयाराम दास जी महाराज ज्ञान, भक्ति और सेवा के जीवंत प्रतीक थे। उनके उपदेशों और आशीर्वाद से अनगिनत भक्तों का जीवन आलोकित हुआ। उन्होंने कहा कि गुरु स्मरण मात्र से जीवन में नवचेतना का संचार होता है और आत्मा में आध्यात्मिक जागरण की ज्योति प्रज्वलित होती है।
महोत्सव के दौरान भजन-कीर्तन और सत्संग की मधुर ध्वनियों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। “सतगुरु तारणहार है, सतगुरु ही मेरे राम…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। गंगा तट की पावन वायु में गूंजते भजनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं मां गंगा भी इस दिव्य आयोजन की साक्षी बनकर आशीर्वाद प्रदान कर रही हों।
बाबा हठ योगी महाराज ने कहा कि यह महोत्सव आत्मा के उत्थान और मानवता के कल्याण का दिव्य संदेश देने वाला महान आध्यात्मिक पर्व है। उन्होंने सभी भक्तों से सतगुरु के बताए मार्ग पर अटल श्रद्धा और सच्चे मन से चलने का आह्वान किया।
इस अवसर पर महंत नारायण दास पटवारी, महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज, पंजाबी बाबा महंत महाराज, महंत हरिदास महाराज, महंत सीताराम दास महाराज, कोतवाल कमल मुनि महाराज, कोतवाल रामदास महाराज सहित विभिन्न मठ-मंदिरों और आश्रमों से पधारे संत-महापुरुष उपस्थित रहे। अंत में विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
गुरु स्मृति महोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु भक्ति ही जीवन को प्रकाशमय, आनंदमय और सार्थक बनाने का सच्चा मार्ग है।

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