हरिद्वार, कमल शर्मा/माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल ने कृषि भूमि को वाणिज्यिक/आवासीय उपयोग में बदलने के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जनहित याचिका संख्या 116/2023 पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 11 मार्च 2026 को आदेश पारित कर हरिद्वार‑रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की बोर्ड बैठक दिनांक 05 नवंबर 2024 में पारित प्रस्तावों पर रोक लगा दी है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया है कि उक्त बैठक के आधार पर किसी भी पक्ष या व्यक्ति द्वारा आगे कोई भी गतिविधि नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि 05.11.2024 की बैठक में कृषि भूमि को आवासीय अथवा ग्रुप हाउसिंग के लिए परिवर्तित करने का प्रस्ताव उसके पूर्व आदेशों के विपरीत है।
यह निर्णय HRDA की 83वीं बोर्ड बैठक में लिए गए उन प्रस्तावों पर लागू होगा, जिनमें हरिद्वार क्षेत्र की कई कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने की अनुमति दी गई थी।
न्यायालय के आदेश के बाद जिन प्रस्तावों पर रोक लगी है, उनमें ग्राम रोहालकी किशनपुर, नूरपुर पंजनहेड़ी, सलेमपुर महदूद-1 और जियापोता स्थित भूमि के मामले शामिल हैं। इन प्रस्तावों के तहत कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में परिवर्तित किया जाना प्रस्तावित था।
माननीय उच्च न्यायालय के इस आदेश के चलते कुल 38,705 वर्गमीटर कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है।
अदालत ने संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की कार्रवाई न्यायालय की अनुमति के बिना आगे न बढ़ाई जाए।
उच्च न्यायालय की सख्ती: हरिद्वार में 38,705 वर्गमीटर कृषि भूमि को आवासीय बनाने के प्रस्तावों पर रोक
