रानीपुर मोड़ स्थित श्री कृष्णा आश्रम में श्री राधा सर्वेश्वर जी की कृपा से पूज्य गुरुदेव गोलोक वासी महंत श्री हेमंकान्त शरण महाराज की पावन स्मृति में तेहरवा वार्षिक भंडारा तथा विशाल संत समागम आयोजित किया गया इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत बिहारी शरण महाराज ने कहा गुरु के चरणों की धूल धन-दौलत से कहीं अधिक मूल्यवान मानी जाती है, क्योंकि गुरु वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञान, भ्रम और भय के अंधकार को चीरकर मनुष्य के भीतर ज्ञान का दीपक प्रज्वलित कर देते हैं। संसार की सारी भौतिक संपत्तियाँ केवल बाहरी सुख दे सकती हैं, परंतु गुरु का सान्निध्य आत्मा को वह शांति, वह स्थिरता और वह समझ देता है जो जीवन को भीतर से समृद्ध कर देती है। गुरु का पावन सान्निध्य तन और मन दोनों को पावन कर देता है इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी अंकित शरण महाराज ने कहा गुरुदेव मनुष्य के भाग्य को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे व्यक्तित्व को नए सिरे से गढ़ देता है; उसके मन मस्तिष्क में ज्ञान का प्रकाश उदय कर देते हैं गुरुके एक संकेत से दिशा मिलती है, एक प्रेरणा से नई ऊर्जा जन्म लेती है, और एक आशीर्वाद से भीतर छिपी शक्ति जाग उठती है। गुरु वह महान आत्माएँ हैं जो शिष्य को केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि जीवन को जीना सिखाती हैं—कैसे निर्णय लेना है, कैसे कठिनाइयों का सामना करना है, कैसे धैर्य रखना है, और कैसे स्वयं को हर परिस्थिति में संतुलित रखना है। उनकी दी हुई शिक्षाएँ कभी कठोर लगती हैं, तो कभी अत्यंत कोमल, परंतु दोनों ही रूपों में वे शिष्य के भले के लिए होती हैं। गुरु की फटकार में भी ममता छिपी होती है और उनके मौन में भी एक गहरी सीख धड़कती रहती है। वे शिष्य को उसकी शक्तियों से परिचित कराते हैं, उसकी कमज़ोरियों को मिटाते हैं, और जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाई को भी अवसर में बदलने की दृष्टि देते हैं। गुरु का प्रेम केवल बाहरी सीख नहीं, बल्कि हृदय से हृदय तक पहुँचने वाली वह अनुभूति है, जो मनुष्य को भीतर से बदल देती है। उनकी कृपा से मनुष्य की सोच विस्तृत होती है, उसके संकल्प मजबूत होते हैं, और उसके भीतर ऐसा आत्मविश्वास जन्म लेता है जिसके सहारे वह जीवन की हर चुनौती को मुस्कुराकर पार कर सकता है। गुरु का मार्गदर्शन ऐसा दीपक है जो तूफ़ानों में भी बुझने से इंकार करता है; उनकी शिक्षाएँ ऐसे बीज हैं जो समय के साथ विशाल वृक्ष बनकर फल और छाया दोनों देते हैं; और उनका आशीर्वाद ऐसी ढाल है जो जीवन की हर विपत्ति को परास्त कर देती है। गुरु का सान्निध्य इतना पवित्र होता है कि उसके पास पहुँचते ही मन की अशांत लहरें शांत हो जाती हैं और हृदय में ऐसी स्थिरता उतरती है जिसे कोई भी धन-संपत्ति खरीद नहीं सकती। इसलिए कहा गया है कि संसार की समस्त संपत्तियाँ मिलकर भी गुरु की महिमा के बराबर नहीं हो सकतीं, क्योंकि गुरु ही वह शक्ति हैं जो मनुष्य के भाग्य का वास्तविक उदय कर देती हैं, उसे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं और उसके जीवन को सर्वश्रेष्ठ मार्ग पर आगे बढ़ाती हैं। यही कारण है कि गुरु की चरण-धूल को भी अमूल्य माना गया है, क्योंकि वह केवल धूल नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और दिव्य सौभाग्य का प्रतीक है, जो मनुष्य के जीवन को भीतर से परिपूर्ण और ऊपर से प्रकाशमान बना देती है। इस अवसर पर बोलते हुए श्रीमहंत रघुवीर दास महाराज ने कहा गुरु के पावन वचन मनुष्य के मन मस्तिष्क में बसे अंधकार को दूर कर उसमें ज्ञान का उदय कर देते हैं बाबा हठयोगी महाराज ने कहा गुरु सत्य का वह मार्ग है जो भवसागर की और जाता है महंत सूरज दास महाराज गुरु मनुष्य के जीवन की ज्ञान निधि है जो भजन सत्संग तथा धर्म कर्म के माध्यम से भक्तों के जीवन को सफल कर देते हैं महामंडलेश्वर श्री राम मुनि महाराज ने कहा इस संसार में गुरुदेव से बड़ा और सच्चा पाठ दर्शन जीवन में कोई और हो ही नहीं सकता सतगुरु की महिमा बड़ी ही अपरंपार है जो लोग गुरु की शरण में होते हैं उनके मानव जीवन का उद्धार हो जाता है महंत नारायण दास पटवारी ने कहा बिना गुरु के ज्ञान नहीं और बिना गुरु के कल्याण नहीं जो लोग गुरु की शरण करते हैं गुरु धर्म कर्म से मार्ग से उनके भाग्य का उदय कर देते इस अवसर पर बाबा हठयोगी महाराज महंत मोहन सिंह महाराज महंत नारायण दास पटवारी महाराज महंत सूरज दास महाराज महंत रघुवीर दास महाराज महंत राघवेंद्र दास महाराज महंत जमुना दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज स्वामी हरिदास महाराज महंत जगजीत सिंह महाराज साध्वी गंगा दास महाराज महामंडलेश्वर गंगा दास उदासीन महाराज महादेवानंद महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज महंत महेंद्र सिंह महाराज महंत राघवेंद्र दास महाराज महंत शुभम गिरी महाराज कोतवाल रामदास महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज कोतवाल कालीचरण महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज श्रवण शंखधर शिवांग भारद्वाज श्री शंखधर श्रीयांश शंखधर दिव्यांश शंखधर देवयानी शंखधर आकाश बहुखंडी गौतम मिश्रा सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे सभी ने आयोजित विशाल भंडारे में संतो के श्री मुख से वही ज्ञान की त्रिवेणी में स्नान करने के बाद भोजन प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया
गुरु वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञान, भ्रम और भय के अंधकार को चीरकर मनुष्य के भीतर ज्ञान का दीपक प्रज्वलित कर देते हैं:श्री महंत बिहारी शरण महाराज
