भू माफियाओं का भूपतवाला में बढ़ता शिकंजा,आश्रमों पर कर रहे कब्जा

हरिद्वार। जलाराम सेवा सदावृत ट्रस्ट की संस्थापक गीता बेन पी मुखी पुत्री पुरूषोत्तम दास मुखी निवासी-जलाराम सेवा सदावृत्त ट्रस्ट, गायत्री विहार कालोनी, गली नं0-3, भूपतवाला, हरिद्वार ने भू-माफियाओं पर मारपीट कर उन्हें आश्रम से बाहर निकालने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।‌
प्रेस क्लब हरिद्वार के सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए गीता बेन ने कहा कि अपनी जमा पूंजी से इस ट्रस्ट की सम्पत्ति क्रय की थी और उसमें एक हॉल, दो बाथरूम, एक बड़ा मंदिर दुर्गा माता का बनवाया। उस ट्रस्ट में 05.11.2001 को महासचिव के रूप में प्रेमानन्द निवासी गायत्री विहार कालोनी, भोपतवाला. विनोदबन्द, अहमदाबाद गुजरात को कोषाध्यक्ष और ललित पुरी गायत्री विहार कालोनी को एक ट्रस्टी बनवाया, कुल 4 सदस्यी ट्रस्ट बनी, तब से मैं संस्थापक अध्यक्ष के रूप में कार्य करती रही।
प्रेमानन्द महासचिव और ललितपुरी के गतिविधियाँ संस्था के नियमों के विरूद्ध चलने लगी, जिससे संस्था की छवि खराब होने लगी। संस्था में प्रेमानन्द और ललितपुरी अनैतिक कार्य करने लगे, जिससे संस्था की छवि गिरने लगी। मैंने रोकने का प्रयास किया तो मुझे कई बार भला बुरा किया, जबकि मेरा ही पूरा पैसा लगा है और मैंने ही जलाराम मंदिर, गायत्री विहार का बॉयलॉज बनवाया था, जिसमें स्पष्ट रूप से बॉयलॉज के पैरा नं0-7 की उपधारा ग और घ में स्पष्ट लिखा है कि अध्यक्ष द्वारा ही व्यवस्थापक को मनोनीत करने का अधिकार है, वही प्रबन्धन एवं सचालनं करेगा। बॉयलॉज की उपधारा-7 के घ में लिखा है कि व्यवस्था पर समुचित फैसला न होने पर अध्यक्ष ही अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर उचित फैसला करेंगे। मैंने अपने अधिकारों का प्रयोग विशेष परिस्थितियों में तब किया जब ललितपुरी और प्रेमानन्द मुझे जान से मारने की धमकी और मेरे आश्रम को हड़पने की साजिसें करने लगे। इसमें इन्होंने नगर के भू माफियाओं को भी जोड़ लिया। तब दिनांक 18.07.2025 को बाहेसियत अध्यक्ष ट्रस्ट सम्पत्ति को खुर्द-बुर्द होने से बचाने के लिए और अपनी नीजि सेवा सुश्रुवा के लिए किसी जलाराम सेवा सदावृत्त ट्रस्ट
सरोजिनी गिरि को महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा का आजीवन अध्यक्ष नियुक्त किया गया। मेरी आयु 75 वर्ष है, मुझे सुनने में दिक्कत होती है। मैं पहाडि़ष्ट भी हूं, ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों ने मेरा ट्रस्ट तोड़ा है, उन्हें बेदखली के नोटिस दिए गए हैं।दिनांक 25.07.2025 को जिला मजिस्ट्रेट हरिद्वार को एक पत्र दिया गया जिसमें बताया गया कि प्रेमानंद और ललित पुरी संस्थागत संपत्ति को नष्ट करना चाहते हैं और मेरी जान को इनसे खतरा हो सकता है। ऐसी संभावना है कि सरोजिनी गिरि को भी इनसे नुकसान हो रहा हो। मेरी आशंका सही साबित हुई और दिनांक 19.08.2025 को जब हम लोग दोपहर करीब 2 बजे उसी आश्रम के हॉल में दरवाजा बंद करके सो रहे थे, ललित पुरी मयूर होटल संचालक मयूर, संजय, अरविंद आदि के साथ छत से अनाधिकृत रूप से आए और मुझे धमकाने लगे कि तुमने सरोजिनी गिरि के सामने वसीयत क्यों बनाई, तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है, उन्होंने मेरी मां और बहन के साथ गाली-गलौज की। सरोजिनी गिरि ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें धक्का दिया और उनके कपड़े फाड़ दिए। मयूर और पुरी ने सारी हदें पार कर दीं। पर्स से 1,70,000/- रुपये, चांदी के बर्तन आदि जबरदस्ती छीन लिए। ललितपुरी ने दरवाजा खोला तो पार्षद आकाश भाटी और प्रेमानंद कुछ अन्य लोगों के साथ अंदर घुस आए। उन्हें घायल कर दिया गया और जान से मारने की धमकी देकर धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। हमारा सामान बाहर फेंक दिया गया। जब हम पुलिस चौकी गए तो किसी ने हमारी नहीं सुनी। जब हम थाने गए तो किसी ने हमारी नहीं सुनी। जब हम हरिद्वार थाने गए तो थाना प्रभारी ने कहा कि उनके साथ कई पार्षद हैं, भाजपा नेता हैं, उनका बहुत प्रभाव है और आप गलत हैं। उन्होंने रिपोर्ट दर्ज नहीं की और उल्टा हमें गाली-गलौज कर भगा दिया। बेबसी में वह 20.08.2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार के समक्ष पेश हुईं।
आयी, मेरी दवाईयाँ, वस्त्र, चप्पल, दवाईयाँ और सब सामान आश्रम में है। हम दोनों एक जोड़ी कपड़े में भटक रहे हैं, मेरी संस्थागत अध्यक्ष सरोजनी गिरि जूना अखाडे की महामण्डलेश्वर है, उनके मान सम्मान का भी ध्यान नहीं रखा गया। आज हैं। ये सब अनाधिकृत लोग आश्रम में घुसे हुए हैं और हम मारे-मारे फिर रहे हैं। भू-माफिया मयूर होटल वाले के इशारे पर हो रहा है वह मेरे आश्रम पर होटल बनाना चाहता था, इसलिये हम लोगों को आश्रम से निकाल फेंका है. हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

अतः आप सब से गुहार कर रही हूँ कि हमें हमारे आश्रम में प्रवेश दिलवाया जाये, सामान वापस दिलवाया जाये, और हमारा छीना झपटी में जो सामान गया है, उसे दिलवाया जाये और दोषी लोगों के विरुद्ध एफ०आई०आर लिखवाई जाये।

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