कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार। यूजीसी के कथित ‘काले कानून’ को वापस लेने की मांग को लेकर हरिद्वार में सवर्ण समाज और संतों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक के नेतृत्व में आर्य नगर चौक से लेकर तुलसी चौक तक रैली निकालकर विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काले झंडे लेकर जमकर नारेबाजी की और सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी द्वारा लाया गया यह कानून समाज के हितों के खिलाफ है और इससे शिक्षा व्यवस्था तथा सामाजिक संतुलन प्रभावित होगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि यूजीसी का यह काला कानून समाज के साथ अन्याय है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और संत समाज इसके खिलाफ लगातार आवाज उठाता रहेगा।
संत विश्वापुरी महाराज ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ऐसे कानून थोपना उचित नहीं है। सरकार को समाज के सभी वर्गों से संवाद कर निर्णय लेना चाहिए और यदि कानून में खामियां हैं तो उसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
जागृति ब्राह्मण समाज BHEL के सचिव संजय शर्मा ने कहा कि यह कानून समाज में असंतोष पैदा कर रहा है। सरकार को चाहिए कि वह समाज की भावनाओं का सम्मान करे और इसे निरस्त करे।
राजवीर शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज अपने अधिकारों के लिए एकजुट है और यदि सरकार ने जल्द इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कुलदीप शर्मा ने कहा कि शिक्षा से जुड़े ऐसे फैसले बिना व्यापक चर्चा के नहीं लिए जाने चाहिए। सरकार को तुरंत इस कानून को वापस लेकर नई नीति पर विचार करना चाहिए।
करण पंडित ने कहा कि समाज के हितों के खिलाफ किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो प्रदेश भर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
हरिहर समाचार की संपादक कमल शर्मा ने कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। जब भी समाज के हितों पर आंच आएगी, तब समाज और मीडिया मिलकर उसका विरोध करेंगे।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से ऋषि शर्मा, बृजमोहन शर्मा, यशपाल शर्मा, अभय त्रिपाठी मनोज ठाकुर कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग और संत उपस्थित रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यूजीसी के कानून को वापस लेने की मांग दोहराई।
