स्पष्टीकरण देने हेतु 24 घंटे समय सीमा समाप्ति की ओर,कोई स्पष्टीकरण न देने पर मातृ सदन में अविछिन्न अनशन/सत्याग्रह की घोषणा

कमल शर्मा
दिनांक – 19-02-2026
मातृ सदन, हरिद्वार

मातृ सदन द्वारा जिला जज हरिद्वार श्री नरेंद्र दत्त को प्रेषित पत्र पर अपना स्पष्टीकरण देने हेतु दिए गए 24 घंटे की समय सीमा समाप्ति की ओर; कोई स्पष्टीकरण न देने पर मातृ सदन में अविछिन्न अनशन/सत्याग्रह की घोषणा ।

  1. मातृ सदन द्वारा पत्र संख्या MS/2K26/HDR/15 दिनांक 18-02-2026 के माध्यम से उठाई गई अत्यंत गंभीर आपत्तियों पर अब तक कोई उत्तर न दिए जाने तथा जिला जज हरिद्वार श्री नरेंद्र दत्त द्वारा अग्रिम जमानत याचिका 116/2026 में पारित आदेश दिनांक 18-02-2026 में की गई पूर्णतः असंगत एवं न्यायिक मर्यादा का ह्रास करने वाली टिप्पणियां, जो मातृ सदन के प्रति पूर्वाग्रह, व्यक्तिगत द्वेष और प्रतिशोध की भावना दर्शाते हैं, के क्रम में पूर्व घोषित निर्णयानुसार मातृ सदन कल से अविछिन्न अनशन/सत्याग्रह की घोषणा करती है, जो तब तक जारी रहेगा जब तक निम्नलिखित उचित कार्यवाही नहीं होती।
  2. दिनांक 18-02-2026 को नूरपुर पंजाहनहेड़ी की घटना दिनांक 28-01-2026 से संबंधित दो व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, जो मातृ सदन से पूर्णतः असंबद्ध हैं, जिला जज श्री नरेंद्र दत्त द्वारा अपने आदेश में मातृ सदन एवं उसके संतों के विरुद्ध अत्यंत गंभीर, आपत्तिजनक तथा अप्रासंगिक टिप्पणियाँ की गईं। संतों के लिबास को लेकर भी अनुचित टिप्पणियाँ की गईं । मातृ सदन के ब्रह्मचारियों के संत होने पर भी प्रश्न उठाया गया । न्यायालय में उपस्थित न रहने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध पीठ पीछे टिप्पणी करना, राज्य के अधिवक्ताओं से एकपक्षीय कथन लेकर उन्हें आदेश में अंकित करना, ये प्रशासनिक गोपनीय चिट्ठी को आदेश का भाग बनाना तथा बिना किसी स्पष्टीकरण या पक्ष सुने एक लब्धप्रतिष्ठित संस्था पर आरोप मढ देना न्यायिक निष्पक्षता के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।
  3. यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि जिला जज श्री नरेंद्र दत्त पहले से ही अग्रिम जमानत याचिकाएँ निरस्त करने का मन बना चुके थे, क्योंकि उन्होंने सुनवाई के दौरान मातृ सदन से संबंधित पत्र पहले से अपने पास मेज पर रखे थे और उन पत्रों को आधार बनाकर असंबद्ध व्यक्तियों की जमानत निरस्त की। यह न्याय के मूल सिद्धांतों के पूर्णतः विपरीत है तथा न्यायालय की गरिमा को ध्वस्त करने के समान है।
  4. जिला जज द्वारा संतों द्वारा माननीय मुख्य न्यायाधीश उत्तराखंड को पत्र लिखने के संवैधानिक अधिकार को “दुराचार (Misconduct)” कहना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। किसी असंबद्ध प्रकरण में उन पत्रों को आधार बनाकर मातृ सदन संस्था की निष्ठा पर प्रश्न उठाना न्यायिक पद की मर्यादा के सर्वथा प्रतिकूल है। यह पूर्वाग्रह से ग्रसित और विद्वेषपूर्वक की गई टिप्पणियाँ स्पष्ट परिलक्षित होतीं हैं ।
  5. यह प्रथम अवसर नहीं है जब श्री नरेंद्र दत्त द्वारा मातृ सदन के उद्देश्यों को बाधित करने का कुंठित प्रयास किया गया है। जब श्री नरेन्द्र दत्त वर्ष 2010-11 में माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय में रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पद पर कार्यरत थे, तब मातृ सदन द्वारा हिमालयन स्टोन क्रशर के विरुद्ध उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में चलाए जा रहे पर्यावरणीय संघर्ष को बाधित करने हेतु उन्होंने अनेक स्तरों पर अवरोध उत्पन्न किए। उस समय भी उनके आचरण के विरुद्ध मातृ सदन द्वारा अनेक पत्र भेजे गए थे, जो अभिलेख में उपलब्ध हैं और शीघ्र सार्वजनिक किए जाएंगे।
  6. यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में जिला एवं सत्र न्यायाधीश चमोली रहे श्री धनंजय चतुर्वेदी द्वारा श्री नरेंद्र दत्त के विरुद्ध गंभीर आरोप न्यायिक अभिलेख में दर्ज हैं। दिनांक 29-12-2023 के निर्णय (रिट याचिका (S/B) संख्या 499/2023, पैरा-5) में वर्णित तथ्यों के अनुसार श्री चतुर्वेदी ने शपथपत्र देकर आरोप लगाया कि उनके पूर्ववर्ती श्री नरेंद्र दत्त ने एक ग्रुप-डी कर्मचारी मनीषा सती को कथित रूप से एक वीडियो क्लिप प्राप्त कर उन्हें झूठे आरोप में फँसाने हेतु प्रयुक्त किया। कॉल-डिटेल के आधार पर उक्त कर्मचारी की लोकेशन 06-05-2023 की रात्रि में श्री नरेंद्र दत्त के आधिकारिक आवास के पास पाई गई थी। अंततः वह वाद श्री चतुर्वेदी के पक्ष में निर्णयित हुआ।
  7. जब किसी न्यायाधीश का आचरण अपने ही सहकर्मी न्यायाधीश के प्रति इस प्रकार विवादित और निम्न स्तर का रहा हो, तब मातृ सदन के विरुद्ध पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणी करना उनके स्थापित आचरण-पैटर्न को ही दर्शाता है। इससे यह सुदृढ़ होता है कि अवसर मिलते ही जिला जज श्री नरेंद्र दत्त द्वारा मातृ सदन के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी कर असंबद्ध व्यक्तियों के साथ भी पूर्णतः अन्याय किया गया।
  8. मातृ सदन सत्य, अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलने वाली संस्था है। न्याय के मंदिर की पवित्रता तथा जनता का न्यायपालिका में विश्वास, ऐसे असंगत वक्तव्यों और आचरण से गम्भीर रूप से आहत हुआ है। अतः इस अन्याय, अत्याचार एवं न्यायिक पद की गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार के विरोध में मातृ सदन सत्याग्रह की घोषणा करती है । यह अविछिन्न अनशन / सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक जिला जज श्री नरेंद्र दत्त द्वारा –

o लिखित क्षमा-याचना प्रस्तुत न की जाए,
o आपत्तिजनक टिप्पणियाँ आदेश से निरस्त (Expunge) न की जाएँ, तथा
o टिप्पणियों के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण न दिया जाए।

— जारीकर्ता:
मातृ सदन, हरिद्वार
दिनांक: 19-02-2026

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