कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
हरिद्वार सदा से भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र रहा है। इसी आध्यात्मिक परंपरा की गौरवमयी कड़ी में कनखल, माँ आनंदमई रोड स्थित परमार्थ ज्ञान मंदिर प्रतिष्ठित आश्रम में एक भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह संपन्न हुआ, जिसने सनातन धर्म की अखाड़ा परंपरा में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े द्वारा सात प्रबुद्ध एवं तपस्वी संतों का ‘महामंडलेश्वर’ पद पर पट्टाभिषेक तथा पारंपरिक ‘चादर विधि’ विधिवत संपन्न कराई गई। यह संपूर्ण अनुष्ठान अखाड़े के अध्यक्ष, परम वंदनीय गुरु भगवान श्री संजीवन नाथ महाराज के पावन सानिध्य और मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को दिव्यता और ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।

महामंडलेश्वर पद: गौरव और उत्तरदायित्व का संगम
सनातन परंपरा में ‘महामंडलेश्वर’ पद अत्यंत प्रतिष्ठित और उत्तरदायित्वपूर्ण माना जाता है। ‘मंडल’ और ‘ईश्वर’ से मिलकर बना यह शब्द उस आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक है, जो ज्ञान, वैराग्य और सेवा का जीवंत स्वरूप होता है। अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर धर्म के ध्वजवाहक एवं परंपराओं के संरक्षक माने जाते हैं।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर साईं माँ नाथ महाराज, महामंडलेश्वर दीपिका नाथ महाराज (राष्ट्रीय महिला महामंत्री), महामंडलेश्वर तारानाथ महाराज, महामंडलेश्वर ज्ञानेश जी महाराज, महामंडलेश्वर आशुतोष नाथ महाराज, महामंडलेश्वर भाविका नाथ महाराज तथा श्री श्री योगी नंद नाथजी महाराज (प्रदेश प्रभारी हरियाणा) सहित अन्य संतों का विधिवत पट्टाभिषेक हुआ।

चादर विधि: परंपरा और समर्पण का प्रतीक
शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार और ‘अलख निरंजन’ के जयघोष से संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा। गुरुओं द्वारा संतों को चादर ओढ़ाकर उन्हें अखाड़े की मर्यादा, अनुशासन और धर्मरक्षा के संकल्प से जोड़ा गया। यह विधि इस बात का प्रतीक है कि अब ये संत व्यक्तिगत जीवन से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के कल्याण हेतु समर्पित रहेंगे।

इस अवसर पर आचार्य श्री चंद्रभूषणानंद जी महाराज की तिलक एवं चादर विधि भी हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। समारोह में पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. अनीता योगेश्वरी जी महाराज, महामंडलेश्वर प्रेम दास महाराज, स्वामी प्रेम चैतन्य महाराज, स्वामी अवेधानन्द जी महाराज सहित बड़ी संख्या में संत महापुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्म और राष्ट्र निर्माण का संकल्प

समारोह का उद्देश्य केवल पद अलंकरण नहीं, बल्कि संत समाज की राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना रहा। नव-नियुक्त महामंडलेश्वरों ने समाज में समरसता, आध्यात्मिक जागरण और सनातन मूल्यों की स्थापना का संकल्प लिया।

हरिद्वार की इस पुण्यभूमि पर संपन्न यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा और गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंतता का प्रमाण प्रस्तुत करेगा। गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े का यह प्रयास सनातन संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
