हरिद्वार, कमल शर्मा/गोविंद घाट पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास श्री भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही ज्ञान और भक्ति की गंगा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और जयकारों से माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।

कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, कंस वध और द्वारका स्थापना के दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म और अत्याचार का अंत कर धर्म की स्थापना की।

महाराज श्री ने रुक्मिणी हरण का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सच्चे प्रेम और अटूट श्रद्धा के कारण भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। कथा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा शिशुपाल वध और भक्त-भगवान के प्रेम से ओतप्रोत गोपी गीत का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इस अवसर पर आयोजक होटल प्राइड एलिट अशोक गोगिया ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन समाज में धर्म, संस्कार और भक्ति की भावना को मजबूत करता है। ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों से लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन जीने की सही दिशा मिलती है।
सुरेंद्र बंसल ने कहा कि कथा के माध्यम से लोगों को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है और समाज में सकारात्मकता का संचार होता है।
सुमित सचदेवा ने बताया कि कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि लोगों में धर्म और आध्यात्मिकता के प्रति गहरी आस्था है।
वहीं राजेंद्र गोगिया ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का भी एक माध्यम है, जहां सभी वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भक्ति और ज्ञान का लाभ उठाते हैं।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए और पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण बना रहा।
