श्री गुरु रविदास लीला समिति मो. कड़च्छ ज्वालापुर के 67वें वार्षिकोत्सव समारोह का समापन

श्री गुरु रविदास लीला समिति मो. कड़च्छ ज्वालापुर के 67वें वार्षिकोत्सव समारोह का समापन
मा.मदन कौशिक पूर्व कैबिनेट मंत्री नगर विधायक हरिद्वार व विशिष्ट अतिथि त्रिलोक सिंह संस्थापक टीटीआर एंटरप्राइजेज,वरिष्ठ समाज सेवी द्वारा संत रविदास महाराज व कलाकारो की आरती वंदना कर रविदास लीला का शुभारम्भ किया गया

श्री गुरु रविदास लीला समिति वार्षिकोत्सव के समापन समारोह मे मो.कड़च्छ ज्वालापुर के श्री गुरु रविदास लीला समिति के समस्त सदस्यों व समाज के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा अतिथियो का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया

इस अवसर पर मुख्य अतिथि मा.मदन कौशिक पूर्व कैबिनेट मंत्री नगर विधायक हरिद्वार ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी से समाज को आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक जागरण का मार्ग दिखाया। उन्होंने भक्ति आंदोलन को नई दिशा देते हुए ईश्वर-प्रेम को जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर रखा। उनकी रचनाएँ सरल भाषा में मानवता, करुणा और समरसता का संदेश देती हैं। एक कवि और संत के रूप में उन्होंने जन-जन के हृदय में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित की, वहीं एक समाज सुधारक के रूप में छुआछूत, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता के विरुद्ध सशक्त आवाज़ उठाई।

विशिष्ट अतिथि त्रिलोक सिंह संस्थापक टीटीआर एंटरप्राइजेज, वरिष्ठ समाज सेवी ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन प्रेरित करता है कि हम प्रेम, समानता और सेवा के मूल्यों को अपनाकर एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण में योगदान दें। उनकी शिक्षाएँ वर्तमान समय में और भी प्रासंगिक हैं, जब समाज को आपसी सद्भाव और आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता है।
इस पावन अवसर पर हम संत रविदास जी की साधना को नमन करते हुये उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।

इस अवसर पर श्री गुरु रविदास लीला समिति ज्वालापुर हरिद्वार के अध्यक्ष मा.श्यामल दबौडिए ने श्री गुरु रविदास महाराज जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि
संत रविदास की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सिकंदर लोदी ने सदना नाम के एक कसाई को संत रविदास के पास इस्लाम अपनाने का सन्देश लेकर भेजा क्योंकि वह सोचता था कि यदि संत रविदास इस्लाम स्वीकार लेंगे तो भारत में बहुत बड़ी संख्या उनके अनुयायी भी इस्लाम के मतावलंबी हो जाएंगे, लेकिन उसकी यह कुत्सित मंशा तब धरी की धरी रह गयी जब वह सदना कसाई उस महान संत के तर्कों तथा उनके व्यक्तित्व व आचरण से गहराई से प्रभावित होकर उनका शिष्य बन गया। इस्लाम त्याग कर उसने वैष्णव पंथ स्वीकार कर लिया और वह रामदास के नाम से सदा सदा के लिए विष्णु भक्ति में लीन हो गया। जरा विचार कीजिये कि यदि उस समय संत सिकंदर लोदी के लालच में फंस जाते या उससे भयभीत हो जाते तो इस देश के हिन्दू समाज को कितनी बड़ी ऐतिहासिक हानि हुई होती; किन्तु पूज्य संत रविदास को कोटि कोटि नमन कि वे जरा भी टस से मस न हुए।
इस अवसर पर श्री गुरु रविदास लीला समिति के समस्त सदस्यों को 67 वे वार्षिकोत्सव के समापन समारोह के शुभ अवसर पर मुख्य अतिथि में विशिष्ट अतिथि द्वारा पुरस्कार वितरण किया गया एवं श्री गुरु रविदास लीला समिति के समस्त सदस्यों द्वारा मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह बैठकर उनका सम्मान किया गया

कार्यक्रम मे मुख्य रूप से रवि प्रकाश अशोक हरदयाल श्यामल दबौडिए शिवपाल रवि योगेंद्र पाल रवि विजय पाल सिंह राजन कुमार अजय मुखिया, किरनपाल अरविंद नौटियाल तीरथपाल रवि,विनोद कुमार,रमेश भूषण जयंती भूषण मेहरचंद नौटियाल कमाल सिह महिपाल कुशलपाल प्रवीण ,पवन दबौडिए रक्षक लांबा योगेश कुमार गोपाल सिंह अभिषेक कुमार दीपांशु दबौडिए आदि सैकड़ो महिलाए पुरुष व बच्चे उपस्थित रहे

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