मां चामुंडा देवी मंदिर शिवालिक हिमालय (मेरु पर्वत) पर स्थित एक अति प्राचीन सिद्धपीठ है: सोनार कोटि अनन्य भक्त श्री पंडित सुनील

आज चामुंडा देवी के अनन्य भक्त श्री सुनील से मिलने का मौका मिला उस दौरान चामुंडा देवी के इतिहास के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि हरिद्वार में चामुंडा देवी मंदिर (जिसे मुख्य रूप से चंडी देवी मंदिर के रूप में शिवालिक हिमालय (मेरु पर्वत) सोनार पर स्थित एक अति प्राचीन सिद्धपीठ है। मान्यता अनुसार, यहाँ चामुंडा रूप में माता प्रकट हुई थीं और इसका वर्तमान मंदिर 1929 में कश्मीर के राजा सुचत सिंह द्वारा बनवाया गया था, जिसे 8वीं शताब्दी के आदि शंकराचार्य से भी जोड़ा जाता है। 

चामुंडा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास और मान्यताएं:

  • पौराणिक कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, शुम्भ-निशुम्भ राक्षसों का वध करने के बाद, देवी चंडी (पार्वती) ने चंड-मुंड नामक राक्षसों का अंत किया था। इसी चामुंडा रूप के कारण यह स्थान चंडी देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • स्थापना: कहा जाता है कि इस सिद्ध पीठ की मुख्य प्रतिमा 8वीं शताब्दी में प्रसिद्ध आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: मान्यता के अनुसार, 1929 ईस्वी में कश्मीर के राजा सुचत सिंह ने इस वर्तमान चंडी देवी मंदिर का निर्माण कराया था।
  • सम्राट अकबर और मंदिर: एक अन्य लोककथा के अनुसार, मुगल सम्राट अकबर भी माता की मूर्ति को ले जाना चाहता था, लेकिन सफल नहीं हुआ, जिसके बाद उसने मंदिर के लिए भूमि दान की थी।
  • महत्व: यह मंदिर हरिद्वार के ‘पंच तीर्थों’ (पांच प्रमुख तीर्थस्थलों) में से एक है और इसे सिद्धपीठ माना जाता है, जहां भक्तों की सभी मन्नतें पूरी होती हैं। 

यह मंदिर चंडी घाट के पास, नील पर्वत के शिखर पर स्थित है, जो हरिद्वार में दर्शनार्थियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है।

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