“उषा टाउनशिप” क्षेत्र में प्रशासनिक सर्वेक्षण संपन्न, निकला झोल

दिनांक: 18 फरवरी 2026

जिलाधिकारी हरिद्वार द्वारा दिनांक 09-02-2026 को पारित आदेश के क्रम में ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, तहसील एवं जनपद हरिद्वार स्थित खसरा संख्या 154 एवं 158 में तथाकथित “उषा टाउनशिप” क्षेत्र में प्रशासनिक सर्वेक्षण संपन्न कराया गया। यह सर्वेक्षण अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) हरिद्वार, उपजिलाधिकारी हरिद्वार, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के अधिकारियों तथा तहसील हरिद्वार के राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

सर्वेक्षण के दौरान वर्तमान में चारदीवारी से घिरे तथाकथित उषा टाउनशिप के अंतर्गत समाहित समस्त भूमि का मापन किया गया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि कुल कब्जे का क्षेत्रफल लगभग 2.97 हेक्टेयर है, जबकि लेआउट की तथाकथित स्वीकृति (जो स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के निर्णयों के उल्लंघन में दिया गया है, जिसपर जांच जारी है) मात्र 0.8973 हेक्टेयर के लिए है। इस प्रकार वास्तविक कब्जा स्वीकृत क्षेत्रफल से लगभग 3.5 गुना अधिक है। तथाकथित “उषा टाउनशिप” में इसी अनियमितता की शिकायत मातृ सदन अनेक बार उठा चुकी है ।

मातृ सदन द्वारा सर्वेक्षण प्रारंभ होने के समय से ही यह इंगित किया जाता रहा है कि यहाँ बड़े पैमाने पर बाग़/कृषि भूमि पर अवैध निर्माण/कब्जा किया जा रहा है, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के निर्णयों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। सर्वेक्षण में यह तथ्य भी अभिलेखित हुआ कि तथाकथित स्वीकृति सीमा से बाहर के क्षेत्र में समस्त समूह आवास (Group Housing) का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

यह प्रकरण केवल एक उदाहरण है। ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी तथा आसपास के अन्य गाँवों के अनेक खसरों में भी इसी प्रकार व्यापक अवैध कब्जे किए गए हैं, जिससे हरित क्षेत्र का गंभीर ह्रास हुआ है तथा मास्टर प्लान का सीधा उल्लंघन हुआ है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा दी गई स्वीकृतियाँ भी सर्वोच्च न्यायालय एवं उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के निर्णयों के उल्लंघन में है, जिनके विरुद्ध आवश्यक आपत्तियाँ एवं हस्तक्षेप पहले ही मातृ सदन द्वारा प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

प्रशासन द्वारा इस संबंध में विस्तृत औपचारिक रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाने की बात कही गई है। तथापि, वर्तमान सर्वेक्षण से “उषा टाउनशिप” में हो रही गंभीर अवैधताओं को इंगित करती है, जिसका सर्वेक्षण 28-01-2026 को प्रस्तावित था। अन्य खसरों का सर्वेक्षण भी शीघ्र किए जाने की सूचना है।

—मातृ सदन, हरिद्वार

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