गुरु-कृपा से साधना, तप से सिद्धि और सेवा से लोकमंगल की राह पर कृष्णा संजय जी महाराज


मोहन गोकुल धाम के पीठाधीश्वर की आध्यात्मिक यात्रा बनी सनातन संस्कृति और समाजसेवा की मिसाल


हरिद्वार(कमल शर्मा)अध्यात्म, साधना, यज्ञ, कथा और लोकसेवा को जीवन का ध्येय बनाकर आगे बढ़ रहे मोहन गोकुल धाम हरिद्वार के पीठाधीश्वर कृष्णा संजय जी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा गुरु-कृपा और तपस्या से लेकर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तक निरंतर जारी है। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म और ईश्वर चिंतन की ओर रहा, जिसने आगे चलकर उन्हें साधना के मार्ग पर अग्रसर किया।
कृष्णा संजय जी महाराज के जीवन में पूज्य 1008 ईश्वरदास जी महाराज (फलाहारी बाबा), ब्रह्मपुरी ऋषिकेश की गुरु-कृपा का विशेष महत्व रहा है। गुरु के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन ने उनकी आध्यात्मिक साधना को नई दिशा प्रदान की। गुरु के प्रति समर्पण के साथ उन्होंने विभिन्न स्थानों पर तप और साधना की। राजस्थान के नाथद्वारा क्षेत्र में पनास नदी के निकट की गई 41 दिनों की तप-साधना उनके जीवन की प्रमुख साधनाओं में शामिल रही है।
यज्ञ और कथा के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना का संदेश
कृष्णा संजय जी महाराज लंबे समय से यज्ञ-साधना से भी जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रार्थना और लोककल्याण का माध्यम है। इसी भावना के साथ वे विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दे रहे हैं।
देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में वे श्रीमद्भागवत कथा, श्रीमद्देवी भागवत, खाटू श्याम कथा सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर कथा और सत्संग कर चुके हैं। उनका प्रयास रहता है कि शास्त्रों में वर्णित ज्ञान को आमजन के दैनिक जीवन से जोड़ा जाए।
धर्म को जीवन और संस्कारों से जोड़ने पर जोर
कृष्णा संजय जी महाराज का मानना है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। धर्म मनुष्य के विचार, व्यवहार, संस्कार और कर्मों में दिखाई देना चाहिए। कथा और सत्संग का उद्देश्य तभी सार्थक है, जब उससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए, परिवार में संस्कार मजबूत हों और समाज में सेवा व सद्भाव की भावना बढ़े।
2 मई 2021 को मोहन गोकुल धाम, हरिद्वार के पीठाधीश्वर के रूप में विराजमान होने के बाद उनकी आध्यात्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिली। मोहन गोकुल धाम में साधना, सत्संग, यज्ञ, धार्मिक आयोजन और सेवा के माध्यम से सनातन संस्कारों को बढ़ावा देने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
लोकसेवा को माना संत जीवन का महत्वपूर्ण दायित्व
कृष्णा संजय जी महाराज की साधना का महत्वपूर्ण पक्ष लोकसेवा भी है। अन्नसेवा, धार्मिक आयोजन, यज्ञ, सत्संग और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से वे समाज को धर्म और सेवा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि संत का जीवन केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि साधना का लाभ समाज और मानवता तक पहुंचना चाहिए।
वर्तमान में राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर में खाटू श्याम कथा के माध्यम से वे श्रद्धालुओं को बाबा श्याम की भक्ति, श्रीकृष्ण की लीलाओं और सनातन धर्म के जीवनोपयोगी संदेशों से जोड़ रहे हैं।
कृष्णा संजय जी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा गुरु-कृपा, तप, यज्ञ, कथा और सेवा का ऐसा संगम है, जिसमें धर्म के साथ सामाजिक सरोकारों को भी विशेष स्थान दिया गया है। उनका संदेश है कि साधना की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उससे मन में करुणा, कर्म में पवित्रता और जीवन में सेवा की भावना पैदा हो।

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