हरिहर आश्रम में रंगोत्सव का महापर्व “होली” अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ सम्पन्न

पतितोद्धारिणी माँ गंगा के पावन तट पर स्थित श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा की आचार्यपीठ – श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में भगवान् मृत्युञ्जय महादेव, भगवान् पारदेश्वर, सिद्धिप्रदाता रुद्राक्ष वृक्ष तथा भगवान् दत्तात्रेय के पावन सानिध्य में रंगोत्सव का महापर्व “होली” अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।

इस पावन अवसर पर श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामण्डलेश्वर अनन्तश्रीविभूषित पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज “पूज्य आचार्यश्री जी” के पावन सानिध्य में आश्रम का सम्पूर्ण वातावरण भक्ति, आनन्द और आध्यात्मिक उल्लास से आलोकित हो उठा। साधु-सन्तों, ब्रह्मचारियों तथा देश-विदेश से पधारे श्रद्धालु भक्तों ने प्राकृतिक एवं शुद्ध रंगों के साथ इस उत्सव को आध्यात्मिक मर्यादा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया।

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में “पूज्य आचार्यश्री जी” ने कहा कि प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली ही स्वस्थ, संतुलित और निरापद जीवन का आधार है। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक उत्सव केवल कुछ सामान्य औपचारिकताओं के निर्वहन का अवसर ही नहीं, बल्कि जीवन के उच्च आदर्शों को जागृत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि “उत्सव का अर्थ है – उच्चता का प्रसव।” अर्थात् वह अवसर, जब मनुष्य अपने भीतर स्थित श्रेष्ठता, सौहार्द और आध्यात्मिक चेतना को अभिव्यक्त करता है।

“पूज्य आचार्यश्री जी” ने आगे कहा कि जो साधक भगवदीय विधान के प्रति समर्पित होकर साधना, सेवा और संयम से जीवन जीता है, उसका सम्पूर्ण जीवन ही एक उत्सव बन जाता है। ऐसे साधक के लिए होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि अन्तःकरण की प्रसन्नता, आत्मिक एकता और समरसता का प्रतीक है।

इस अवसर पर भारत माता मन्दिर, समन्वय सेवा ट्रस्ट, भारतमाता जनहित ट्रस्ट तथा भारत सदन, हरिद्वार में भी रंगों का यह पावन पर्व अत्यंत उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। श्रद्धालुओं ने परस्पर प्रेम, सौहार्द और आत्मीयता के साथ रंगों का आदान-प्रदान कर भारतीय संस्कृति की समन्वयी भावना को सजीव रूप प्रदान किया।

इस पावन अवसर पर पूजनीया महामण्डलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि “दीदीजी”, उज्जैन से पधारे महामण्डलेश्वर पूज्य श्री स्वामी शान्ति स्वरूपानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर श्री स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, समन्वय सेवा ट्रस्ट के सचिव श्री आई. डी. शास्त्री जी, श्री हरिहर जोशी जी, श्री उदय नारायण पाण्डेय जी, हरिहर आश्रम के प्रबन्धक पूज्य श्री स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी, पूज्य श्री स्वामी सोमदेव गिरि जी, पूज्य श्री स्वामी ज्ञानानन्द गिरि जी, पूज्य श्री स्वामी रामात्मानन्द गिरि जी, संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी, अधिकारीगण, आश्रम के वैदिक ब्रह्मचारी-गण, आचार्यगण तथा देश-विदेश से पधारे अनेक श्रद्धालु भक्तों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विश्वविख्यात रासाचार्य पद्मश्री सम्मानित स्वामी श्रीराम स्वरूप जी शर्मा श्रीधाम वृन्दावन वाले के सुपौत्र स्वामी श्री राम वल्लभ शर्मा जो कि इस परम्परा में 17वीं पीढ़ी पर हैं, उनके द्वारा दिव्य श्रीकृष्ण रासलीला एवं बृज की प्रसिद्ध होली का दिव्य एवं भव्य मंचन किया गया।

भारतीय संस्कृति में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि समरसता, प्रेम, क्षमा और आत्मिक उल्लास का महापर्व है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि जीवन के विविध रंग अंततः एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। जब मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, द्वेष और संकीर्णताओं को त्याग देता है, तब उसके जीवन में प्रेम, सौहार्द और आनन्द के दिव्य रंग स्वतः प्रकट हो जाते हैं।

इसी आध्यात्मिक सन्देश के साथ श्री हरिहर आश्रम में मनाया गया यह रंगोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवन्त परम्परा, साधु-समाज की समन्वयी भावना और आध्यात्मिक जीवन के उल्लासपूर्ण दर्शन का दिव्य प्रतीक सिद्ध हुआ। इस प्रकार माँ गंगा के पावन तट पर स्थित श्री हरिहर आश्रम में मनाया गया यह होली उत्सव श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पूर्ण समाज को यह सन्देश देता है कि जब जीवन आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ता है, तब प्रत्येक दिन और प्रत्येक क्षण एक उत्सव बन जाता है।

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