ईश्वर स्वयं को संत के माध्यम से अपनी पूर्ण महिमा, असीम शक्ति, ज्ञान और आनंद के साथ प्रकट करते हैं।
हरिद्वार 9 फरवरी 2026, आज अपनीधर्मिक यात्रा से लौटे आवाहन अखाड़े के श्री श्री महंत सत्यगिरी जी महाराज से भेंट करने का सुअवसर मिला l अपनी यात्रा के विषय में बताते हुए महाराज श्री ने बताया कि संत तीर्थयात्रियों के लिए ईश्वर के तीर्थस्थल तक पहुँचने की सीढ़ी हैं। जहाँ भी संत और ऋषि एक पल के लिए भी निवास करते हैं, वहीं से वाराणसी, प्रयाग और वृंदावन जैसे पवित्र स्थान बन जाते हैं। संत धरती पर एक आशीर्वाद हैं।
साधु स्वभाव से निरासक्त (निरास) होते हैं — ना उन्हें भोग की लालसा होती है, ना संग्रह का अभिमान। साधु का जीवन तीन बातों पर टिका होता है — – भगवान की सेवा – नाम जप – मंत्र जप वे कम बोलते हैं, गंभीर रहते हैं, और अपने आचरण से लोगों को भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। साधु दिखावे में नहीं, साधना में विश्वास रखते हैं।
सत्संग करने से क्या लाभ होता है? जब हम सत्संग में बैठते हैं तो हमारी चेतना बदल जाती है, सकारात्मक हो जाती है। मन को भक्ति के वातावरण में डालते है तो हम भक्तिमय हो जाते है। लोभ और लालच मे ड़ालते है तो लोभ, लालच दिमाग को पकड़ लेता है।
