कमल शर्मा (हरिहर समाचार)
उज्जैन,आवाहन अखाड़े के महामंत्री श्री महंत सत्यगिरि जी महाराज आजकल महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में भ्रमण कर रहे हैं साथ ही नित्य हवन पूजन आदि निरंतर कर रहे हैं आज पूछने पर महाराज श्री ने बताया कि साधु-महात्मा हवन आध्यात्मिक शुद्धि, वातावरण को शुद्ध करने, सकारात्मक ऊर्जा के संचार और देवताओं से जुड़ने के लिए करते हैं; यह नकारात्मकता को दूर करता है, स्वास्थ्य लाभ देता है और किसी भी शुभ कार्य के शुभारंभ के लिए ऊर्जा प्रदान करता है, जिसमें मंत्रोच्चार और औषधीय पदार्थों का प्रयोग होता है. इसके अलावा भी हवन का और भी कई तरीके से महत्व है इस बारे में भी गुरु जी ने विस्तार से बताया _कि संत हवन को आत्म-साधना, पर्यावरण संरक्षण और ईश्वरीय कृपा प्राप्ति के एक शक्तिशाली अनुष्ठान के रूप में भी महत्वपूर्ण मानते हैं l जैसे —
धार्मिक और आध्यात्मिक कारण:
- ईश्वर से जुड़ाव: हवन अग्नि को देवताओं का मुख माना जाता है, जिसके माध्यम से आहुतियाँ और प्रार्थना सीधे देवताओं तक पहुँचती हैं.
- आत्मा की शुद्धि: यह एकाग्रता, संयम और आत्म-शुद्धि का एक माध्यम है, जिससे व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से सशक्त होता है.
- देवताओं को प्रसन्न करना: हवन के द्वारा देवी-देवताओं को प्रसन्न कर उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है.
- नकारात्मकता का अंत: नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी आत्माओं के प्रभाव को खत्म करने के लिए हवन किया जाता है.
- वातावरण का शोधन: हवन सामग्री (घी, जड़ी-बूटियाँ, कपूर, लोबान) से निकलने वाला धुआँ हवा को शुद्ध करता है और हानिकारक बैक्टीरिया व विषाणुओं को नष्ट करता है.
- स्वास्थ्य लाभ: हवन का धुआँ श्वसन संबंधी रोगों में लाभकारी होता है और मन को शांत कर तनाव कम करता है.
- सकारात्मक ऊर्जा: मंत्रोच्चार और अग्नि से उत्पन्न कंपन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और शांति फैलाते हैं.
अन्य उपयोग:
- संकल्प और शुभारंभ: किसी भी नए कार्य, जैसे गृहप्रवेश, विवाह या अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत में सकारात्मकता लाने के लिए हवन करते हैं.
- ग्रह शांति: ग्रह दोषों को शांत करने और जीवन में सौभाग्य लाने के लिए भी हवन किया जाता है.
