ऋषिकुल परिसर में पंचकर्म पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन, इंटर कॉलेज स्तर पर क्विज प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह

हरिद्वार : उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल परिसर में आयोजित दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार “Recent Advancements in Panchkarma 2025” मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। समापन समारोह में नगर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, रानीपुर विधायक आदेश चौहान सहित कई गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

आज दूसरे दिन के कार्यक्रम की शुरुआत पंचकर्म पर आधारित वैज्ञानिक सत्र से हुई। इस दौरान देशभर के प्रमुख आयुर्वेद विशेषज्ञों ने पंचकर्म की नवीनतम तकनीकों एवं भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में सबसे अधिक शोध पत्र पढ़े गए एवं पत्रिका में लगभग 100 से अधिक शोध पत्रों को सम्मिलित कर आयुर्वेद में पंचकर्म की विशेषताओं को संकलन करने का कार्य किया गया

प्रोफेसर एच.एम. चंदोला, प्रो. यू.एस. निगम, प्रोफेसर संजय त्रिपाठीप्रो. गोपेश मंगल, प्रो. अनूप गक्खर, स्वामी ज्ञानानंद शास्त्री, प्रो. नरेश चौधरी, प्रो. अशोक शर्मा, प्रोफेसर राधा वल्लभ सती एवं प्रो. सुधीर मुड्डेपी, डॉ राजीव कुरेले जैसे विद्वानों ने सत्रों की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन कर प्रतिभागियों को समृद्ध किया।

कार्यक्रम का आकर्षण रहा इंटर कॉलेज स्तर की क्विज प्रतियोगिता “आयुर्प्रज्ञा”, जिसका संचालन प्रोफेसर आलोक श्रीवास्तव ने निकर्म एवं आयुर्वेद विप् Sending messages… ¡ किया।

तियोगिता में मुख्य परिसर के प्रियंका अंतवाल, श्रेया गोयल ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव

कार्यक्रम का आकर्षण रहा इंटर कॉलेज स्तर की क्विज प्रतियोगिता “आयुर्प्रज्ञा”, जिसका संचालन प्रोफेसर आलोक श्रीवास्तव ने किया जिसमें प्रतिभागियों ने पंचकर्म एवं आयुर्वेद विषय पर अपने ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में मुख्य परिसर के प्रियंका अंतवाल, श्रेया गोयल ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया, वहीं द्वितीय स्थान ऋषिकुल के अरुण जैन निशांत गोयल के हिस्से में आया। पतंजलि आयुर्विज्ञान संस्थान के ऋषि यादव एवं दीपेश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में प्रो. एच. एम. चंदोला, प्रो. आर.बी. सती एवं प्रो. अनुप कुमार गक्खर शामिल रहे।

समापन सत्र में अतिथियों ने कहा कि पंचकर्म आयुर्वेद की आत्मा है और इसके वैज्ञानिक प्रमाणों को विश्व स्तर तक पहुंचाना समय की मांग है। विधायक मदन कौशिक ने कहा कि पंचकर्म के लिए उत्तराखंड को पूरे भारतवर्ष में जाना जाना चाहिए। इसमें बहुत तेजी के साथ आगे बढाने के लिए विशेष चिंतन की आवश्यकता में करनी पड़ेगी। होटलों धर्मशालाओं के अंदर में हम पंचकर्म सेंटर प्रारंभ कर सकते हैं। कोरोना कल में हमने आयुर्वेद के गौरव को देखा है आज चिकित्सा पद्धति योग एवं आयुर्वेद के रूप में विश्वभर में स्थापित हो रही है। रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने कहा कि यहां आयुर्वेद के शोध और नवाचार ही प्रदेश को क्लिनिकल वैलनेस डेस्टिनेशन बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हम औषधीयों की गुणवत्ता ठीक ढंग से मेंटेन कर पाए तो मैं समझता हूं कि आयुर्वेद की जो प्रतिष्ठा देश में तो ठीक है आज विश्व के अंदर भी वह और ज्यादा पड़े और लोगों का कल्याण भी होगा लोगों का जीवन निरोग होगा l पाठी ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि पंचकर्म की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए डाटा संकलन करना और कार्यों अरुण कुमार त्रिपाठी ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि पंचकर्म की प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए डाटा संकलन करना और कार्यों को प्रामाणिकता के साथ उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।

दो दिवसीय इस संगोष्ठी में देशभर से आए 500 से अधिक शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने भागीदारी की। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने किया और समापन पर परिसर निदेशक प्रो. दिनेश चंद्र सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में इस अधिवेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर के के शर्मा को अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर भावपूर्ण विदाई दी गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *